Home स्पेशल रिपोर्ट रियो ओलंपिक में 3 मुस्लिम एथलिट ने दिखायी इस्लाम की सकारात्मक शक्ति

रियो ओलंपिक में 3 मुस्लिम एथलिट ने दिखायी इस्लाम की सकारात्मक शक्ति

ओलंपिक समारोह से पहले, रियो ओलम्पिक में मुस्लिम खिलाड़ियों को कई तरह से आतंकवाद के खतरे और सुरक्षा व्यवस्था को बिगाड़ने के साथ जोड़ा जा रहा था. लेकिन जब खेलो के महाकुम्भ आज जब अपने चरम पर हैं, आतंकी हमले की आशंका खिलाड़ियों के दिलो से निकल चुकी हैं.

रियो ओलंपिक में मुस्लिम एथलिट के शानदार प्रदर्शन और प्रतिभा को देखने के बाद इस्लामोफोबिया रियो से खत्म हो गया हैं.

मोहम्मद फराह, सारा अहमद और इब्तिहाज मोहम्मद कुछ ऐसे मुस्लिम खिलाड़ियों के नाम हैं जिन्होंने रियो में संदेह, नस्लवाद और इस्लामोफोबिया के बीच ओलंपिक में अपने नाम के साथ अपने देश के नामो को रौशन कर दिखाया.

ब्रिटिश की लंबी दूरी के धावक, मोहम्मद फराह, जिन्होंने लन्दन ओलंपिक में 10 हज़ार मीटर की दौड़ में एक के बाद एक दो स्वर्ण पदक अपने नाम किये थे, वही इस बार भी 10 हज़ार मीटर की दौड़ में बीच मैदान में गिरने के बाद स्वर्ण पदक अर्जित कर एक नया इतिहास रच दिया.

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दौड़ ख़त्म होने के बाद मोहम्मद अपने घुटनो के बल ज़मीन पर प्रार्थना के लिए सर को झुका दिया. और साथ ही अपने समर्थको का भी धन्यवाद किया. दौड़ के बाद मोहम्मद ने बताया कि “हमेशा मैं दौड़ शुरू होने से पहले दुआ (प्रार्थना) करता हूँ,”

हिजाब बांधने वाली महिला को अक्सर धार्मिक और स्वतंत्राताहीन समझा जाता हैं लेकिन मिस्र की हिजाब बांधने वाली सारा अहमद, वेटलिफ्टिंग में कांस्य पदक जीत इतिहास के पन्नो में पाना नाम स्वर्णा अक्षरो से लिखवा दिया, और इस्लामोफोबिया जैसी मानसिकता रखने वालो को करारा जावेद दे दिया.

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यह पदक हासिल कर सारा पहली ऐसी महिला बन गयी जिसने अरब देशो से पदक जीत हो, और मिस्र के पिछले 104 साल के इतिहास में ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली महिला बन गयी हैं.

रियो ओलंपिक में अमेरिका का नेतृत्व करने वाली इब्तेहाज महम्मद, हिजाब बांध कर मैदान में उतरी इब्तिहाज ने अप्पने विपक्षी को धूल चटा कर यह साबित कर दिया कि महिलाये भी किसी से पीछे नहीं हैं.

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