Home मिडिल ईस्ट राष्ट्रपति एर्दोगोन ने मनाई सूफी कवी जलालुद्दीन रूमी की 744वीं वर्षगाँठ

राष्ट्रपति एर्दोगोन ने मनाई सूफी कवी जलालुद्दीन रूमी की 744वीं वर्षगाँठ

source: Daily Sabah

World News Arabia published date:18-December-2017 Time: 06:03 PM

तुर्की ने रविवार को शब-ए अरस के मौके पर 13 वीं शताब्दी के कवि, विद्वान और सूफी रहस्यवादी जलालुद्दीन मोहम्मद रुमी की 744 वीं की पुण्यतिथि मनाई.

तुर्की के केंद्रीय प्रांत कोन्या, जहां पर रूमी को दफन कर दिया गया था, यह समारोह भी उसी जगह आयोजित किया गया.  इस मौके पर राष्ट्रपति रसेप तय्यिप एर्दोगान ने कहा, “प्रेम की लपटें, जो कि मेवलाना की ज्वाला अभी भी जलती है, हालांकि इसे बीते हुए सात से ज्यादा दशक हो गये है.”

रूमी को मानने वालो ने यानी उनके फोल्लोवेर्स ने तुर्की में मेवलाना के रूप में याद किया जाता है – जिसका अर्थ है “विद्वान.” “हमारे दिल, जो बंजर हो गए थे, यह फिर से भर आए है.” वहीँ एर्दोगन ने कहा कि हम मसनावी और मेवलाना की शिक्षाओं के ज्ञान के लिए खुद को आभारी मानते है.

रुमी की मसनावी कविता, 50,000 से ज्यादा छंदों के साथ, सूफीवाद में उनका काम सबसे प्रभावशाली माना जाता है और उनकी कविताओं का 25 भाषाओं में अनुवाद किया गया है.

दरवेश शम्स तबरेज़ को खोने के बाद रूमी ने मानव ह्दय की दुर्दशा पर कवितायेँ लिखि थीं “भाईचारे” के बारे बात करते हुए, इस साल के जश्न के लिए एक विषय भी तैयार किया गया था, राष्ट्रपति ने कहा, “जब तक हम भाइयों की तरह एक साथ हैं, तब तक कोई हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता.”

उन्होंने कहा, “अगर हम इसी तरह से एकजुट होकर डटे रहे तो सांप्रदायिक, अलगाववादी या जातीय अशांति को फैलाने वाली कोई भी चाल कामियाब नहीं होगी“.

1273 में अपनी मौत के बाद, रूमी को मानने वालो ने मेवलेवी आदेश की शुरुआत की थी, जिसे ऑर्डर ऑफ़ द व्हार्ललिंग डेवर्स्ज़ भी कहा जाता है, जो कि सुफी समा सेरेमनी के लिए मशहूर है.

हर साल एक अंतरराष्ट्रीय श्रद्धांजति समारोह, जिसे “शब-ए अरस” या संघ की रात के रूप में जाना जाता है, अल्लाह की दुआओं के साथ रुमी के यूनियन की वर्षगांठ, 7 दिसम्बर से 17 दिसंबर के बीच कोनिया में मनाई जाती है, जिसे मुस्लिम विद्वान के प्रति सम्मान के जश्न के लिए मनाते है.

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