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पवित्र शहर फिलिस्तीन के फैसले पर ट्रम्प के लिए बड़ा लोगों का आक्रोश

फिलिस्तीन की राजधानी येरुसलम को इस्राइल की राजधानी के रूप में मान्यता देने पर पुरे विश्व में अभी अशांति फैली हुई है, बड़े बड़े नेताओं ने इस फैसले की निंदा की है. अरब लीग के नेता इस फैसले से असंतुष्ट हैं. कई नेताओं का कहना है की ट्रम्प का यह शांति बनाये रखने के फैसले के परिणाम अच्छे नहीं होंगे. फिलिस्तीन लोग ट्रम्प के खिलाफ हो चुके हैं उन्होंने ट्रम्प की फोटो भी जलाई है.

येरुसलम जो की यहूदी, इस्लामिक और ईसाईयों तीनो धर्मों के लोगों के लिए एक धार्मिक नगरी है. उसे इस्राइल की राजधानी पर सभी नाखुश हैं, फिलिस्तीन के लोगों ने चेतावनी देकर कहा की इंतीफदा” अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा इजरायल की राजधानी के रूप में यरूशलेम को पहचानने के लिए एक निर्णय का पालन कर सकता है.

यू.के. में फिलीस्तीनी राजदूत मैनुअल हस्सासियन ने ट्रम्प की नीतिगत बदलाव को “अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों का उल्लंघन” के रूप में ब्रांडेड किया,जिसमे उन्होंने कहा की फिलिस्तीनियों के अधिकारों को कुचला गया और इस्राइल के खतरे में डाल दिया गया. उन्होंने कहा की यह स्थिति बहुत ही ज्यादा जोखिम भरी है.

येरुसलम की तरफ अमेरिका की पहल के लिए उन्होंने कहा की “ट्रम्प के अंदर एक कीड़ा है जिसे नियंत्रण में रखना मुश्किल है.” ट्रम्प के इस फैसले ने मिडिल ईस्ट के लोगों को भड़का दिया है , नेताओं ने इस फैसले की चेतावानी भी दी थी.

Jerusalem, Palestine

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मंगलवार की रात डोनाल्ड ट्रम्प से एक फोन कॉल करने के बाद से, फिलीस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने क्षेत्रीय सहयोगियों, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के साथ मिलकर संपर्क किया और कहा की वह इस फैसले की निंदा करते हैं.

हस्सियन ने कहा कि अमेरिकी ने इजरायल और फिलिस्तीनियों के बीच शांति के रूप में अपनी भूमिका खराब कर दी. हस्सियन ने कहा की जेरुसलम का मुद्दा अब धार्मिक विवाद हो चूका है, 1.5 अरब मुसलमान इसे स्वीकार नहीं करेंगे.

पूर्व यरूशलेम पर 1967 युद्ध के बाद से इस्राइल द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया, जबकि उसे फिलिस्तीन क्षेत्र माना जाता है. फिलिस्तीन एकता अभियान के निदेशक बेन जमाल ने सहमति व्यक्त की और उन्होंने कहा की “डोनाल्ड ट्रम्प ने जो फैसला किया है वह अंतर्राष्ट्रीय कानून का एक बड़ा उल्लंघन है और वैध अधिकारों और फिलीस्तीनी लोगों के दावों की उपेक्षा करता है”

ट्रम्प की इस नीति का ब्रिटेन के मुस्लिम एसोसिएशन के उमर एल-हम्मून के अध्यक्ष ने निंदा की और कहा कि “यह लगभग आग पर तेल डालने की तरह है”.
जमाल ने कहा की “जो अंतर्राष्ट्रीय कानून का समर्थन करते हैं, वह सभी इस फैसले की निंदा कर रहे हैं.”