Home मिडिल ईस्ट सीरिया और इराक में मुंह की खाने के बाद, इस्राइल के निशाने...

सीरिया और इराक में मुंह की खाने के बाद, इस्राइल के निशाने पर मिस्र

मिस्र के उत्तरपूर्वी क्षेत्र में सीना मरुस्थल स्थित है और यह पूरब से अक़बा खाड़ी से जबकि पश्चिम से स्वेज़ खाड़ी, उत्तर से भूमध्य सागर और दक्षिणी से लाल सागर से मिला हुआ है।

इस मरुस्थल की आबादी लगभग आठ लाख है और यह क्षेत्र रणनैतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एशिया और अफ़्रीक़ा महाद्वीप को एक दूसरे से जोड़ता है।

इस महाद्वीप का महत्व उस और अधिक हो जाता है जब हमको यह पता चलता है कि इस क्षेत्र को लेकर काफ़ी झड़पें हुई हैं। सबसे अधिक झड़पें मिस्र और ज़ायोनी शासन के बीच हुई हैं। ज़ायोनी शासन के लिए इस महाद्वीप का महत्व बहुत अधिक है।

कि उसने अब तक दो बार इस क्षेत्र पर हमला किया और इस क्षेत्र का नियंत्रण प्राप्त करने के लिए बहुत से क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय प्रयास और कार्यवाहियां की हैं।

यह झड़पें अब तक जारी हैं। इस प्रकार कि ज़ायोनी शासन के सामाजिक मामलों के मंत्री जीला जमलइल ने कहा था कि सीना मरुस्थल फ़िलिस्तीन देश के गठन के लिए बेहतरीन जगह है। ज़ायोनी मंत्री का यह बयान इस बात का चिन्ह है।

कि इस्राईल का फ़िलिस्तीन की धरती पर स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी देश के गठन का न तो कोई कार्यक्रम है और न ही कोई रुचि है और वह निकट भविष्य में पूरे क्षेत्र का यहूदीकरण करने की अपनी नीति आगे बढ़ा रहा है।

अलबत्ता यह कोई नहीं बात नहीं है कि इस्राईल, फ़िलिस्तीनी देश के गठन में कोई रुचि नहीं रखता है और ज़ायोनी शासन के अधिकारियों ने इसको कई बार स्वीकार भी किया है। ज़ायोनी शासन के शिक्षा व प्रसारण मंत्री नेफ़्ताली बिनेत ने जारी वर्ष डोनल्ड ट्रम्प के अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन के दौरे के अवसर पर दावा किया था कि स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी देश का गठन कभी नहीं होगा।

वास्तव में इस्राईल का प्रयास है कि सऊदी अरब के साथ सहयोग करके वह स्वतंत्र फ़िलिस्तीन के गठन की योजना को कमज़ोर कर सके और मिस्र के विभाजन की योजना को आगे बढ़ा सके। बहरहाल आतंकवादी गुट दाइश के साथ सहयोग करके इस्राईल से मिलने वाली सीमा पर न तो इस्राईल के विरुद्ध कोई कार्यवाही की बल्कि प्रमाण और सबूतों से पता चला है कि इस्राईल ने तकफ़ीरी आतंकियों का उपचार भी किया है।

बहरहाल सीरिया और इराक़ में इस्राईल, सऊदी अरब और अमरीका की विफलता के बाद इस्राईल ने अपनी योजनाओं को व्यवहारिक बनाने के लिए मिस्र पर नज़रें गाढ़ दी है और अब समय ही बताएगा कि क्या उसे एक बार फिर अपनी योजनाओं में मुंह की खानी पड़ेगी?