Home मिडिल ईस्ट जेरुसलम निर्णय पर भारत की मौन प्रतिक्रिया से अरब लीग है नाखुश

जेरुसलम निर्णय पर भारत की मौन प्रतिक्रिया से अरब लीग है नाखुश

source- times of israil

world news Arabia published date 19-December-2017 time: 15:27

अमेरिका सहयोगी ब्रिटेन और फ़्रांस सहित दुनिया भर के देशों ने जेरुसलम निर्णय पर ट्रम्प की आलोचना की थी, परन्तु भारत ने कोई पक्ष नहीं लिया.

दर्जनों अरब राजदूतों ने भारत को जेरुसलम कदम पर अपनी प्रतिक्रिया देने को कहा था, नई दिल्ली के मौन प्रतिक्रिया से पूरा अरब लीग नाखुश है.

पिछले हफ्ते नई दिल्ली में सऊदी अरब, सूडान, अल्जीरिया, मिस्र, मोरक्को, इराक, ट्यूनीशिया, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत सहित कई अरब राज्यों ने विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर से मुलाकात कर अरब लीग की इस बैठक की जानकारी दी.

इसराइल का कहना है कि पूरा येरुशलम उसकी राजधानी है. फिलिस्तीनी पूर्वी येरुशलम को भविष्य के अपने स्वतंत्र राष्ट्र की राजधानी बनाना चाहते हैं. ट्रंप के फैसले ने उन्हें अलग थलग करने के साथ ही द्विराष्ट्र के सिद्धांत पर उनका देश बनने की उम्मीदों को भी ध्वस्त कर दिया है.

फिलिस्तीनी अथॉरिटी के अध्यक्ष महमूद अब्बास ने भी राजनयिक चैनलों के माध्यम से एक संदेश भेजा था जो अमेरिकी स्थिति की फिलीस्तीनी अस्वीकृति के लिए भारतीय समर्थन मांग रहा था.

बैठक में उपस्थित एक अरब राजदूत के अनुसार, “भारतीय प्रतिक्रिया निराशाजनक थी क्योंकि भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले की कोई निंदा नहीं की और हमने भारतीय पक्ष को बताया भी की भारत को एक मजबूत दावे के साथ आना है.

भारत के विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर ने कहा की “भारत अपनी स्थिति पर कायम है और वह किसी भी तीसरे पक्ष से स्वतंत्र है. बयान में येरुशलम का कोई जिक्र नहीं था जिसके बाद घरेलू स्तर पर इसे अपर्याप्त, ढुलमुल और फिलिस्तीन विरोधी कहा गया”

व्हाइट हाउस से 6 दिसंबर को एक संबोधन में, “अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जेरुसलम को इस्राइल की राजधानी के रूप में मान्यता दी थी और कहा था की यह दोनों देशों के बीच शांति की पहल होगी.”

जेरुसलम की मान्यता के कुछ दिनों बाद, भारत के कश्मीर में सैकड़ों मुसलमानों ने इस फैसले का विरोध किया, प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार की नमाज के बाद श्रीनगर और क्षेत्र के अन्य हिस्सों के मुख्य शहर में अमेरिका और इजरायल के झंडे जला दिए थे.

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पिछले दो दशकों में इजरायल के साथ भारत के घनिष्ठ संबंधों के बावजूद भी नई दिल्ली पारंपरिक रूप से फिलिस्तीनी समर्थक रही है, जो गैर-अलगाववादी आंदोलन और इसकी बड़ी मुस्लिम आबादी के साथ अपने लंबे संबंधों को दर्शाती है, हालांकि, हाल के वर्षों में यह बदलाव शुरू हो गया है, मुख्यतः भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी हिंदू राष्ट्रवादी भाजपा पार्टी के चुनाव के बाद से भारत का इस्राइल की तरफ रुख ज्यादा बढ़ गया है.

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नेतान्याहू जनवरी में भारत की यात्रा करेंगे, जुलाई में इजराइल के उच्च प्रोफ़ाइल यात्रा के बाद नेतान्याहू भारत आने के लिए तैयार हैं, यह एक भारतीय प्रधान मंत्री द्वारा इजरायल की पहली यात्रा थी, अब्बास ने भी मई में सहयोग के संबंध में चर्चा करने और संबंधों को मजबूत करने के लिए भारत का दौरा किया था और भारत के प्रधानमन्त्री मोदी के साथ मुलाकात की थी.