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बैतुल मुक़द्दस पर खून खराबे के लिए अमेरिका होगा ज़िम्मेदार – तैय्यप एर्दोगोन

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अंकारा – बैतुल मुक़द्दस को इस्राइल की राजधानी घोषित करने के डोनाल्ड ट्रम्प के फैसले के बाद से अरब देशों और मिडिल में उथल पुथल का माहौल शुरू हो चूका है. तुर्की, जॉर्डन, मिस्त्र, फिलिस्तीन, मलेशिया और मिडिल ईस्ट के देशों में विरोध प्रदर्शनों के सिलसिला जारी है. सऊदी विदेश मंत्री अल-जुबैर ने अरब लीग की बैठक में ट्रम्प के इस फैसले को एक सिरे से नकार दिया, उन्होंने कहा की यह निर्णय मुसलमानों को उकसा सकता है (पढ़े खबर). वही इस मामले में सबसे अधिक व्याकुल अगर कोई देश नज़र आ रहा है तो उनमे तुर्की का स्थान सबसे ऊपर है.

तुर्की के राष्ट्रपति तय्यप एर्दोगोन ने सोमवार को कहा कि यरूशलेम को इजरायल की राजधानी के संयुक्त राज्य अमेरिका के निर्णय के रूप में वॉशिंगटन को हिंसा में सहभागित कर दिया। इजरायल की लगातार आलोचक रहे एर्दोगान ने कहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस क्षेत्र में हिंसा की चपेट में आएगा.

एर्दोगान ने अंकारा में एक भाषण में कहा, “जो लोग मुसलमानों और अन्य धर्मों के सदस्यों के लिए यरूशलेम को एक तहखाना बनाते हैं, वे कभी अपने हाथों से रक्त को साफ नहीं कर पाएंगे.” उन्होंने कहा, “यरूशलेम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता देने के उनके फैसले से, संयुक्त राज्य अमेरिका इस रक्तपात में एक भागीदार बन गया है,” उन्होंने कहा, उन्होंने ट्रम्प के निर्णय को बाध्यकारी नहीं माना.

ट्रम्प के फैसले ने पिछले हफ्ते यरूशलेम, पर लंबे समय से चली आ रही अमेरिकी नीति को उलट दिया. ध्यान रहे यरूशलेम की स्थिति पीढ़ियों से इस्राइल और फिलिस्तीनियों के बीच शांति समझौते की सबसे बड़ी बाधा है. एर्दोगान ने सप्ताहांत में इजरायल को एक “आतंकवादी राज्य” और “आक्रमणकारी राज्य” के रूप में संदर्भित किया था, जिससे इज़राइली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को आग बबूला हो गए थे.

क्या कहा सऊदी अरब ने ?

सऊदी विदेश मंत्री अल-जुबेइर ने कहा की वह ट्रम्प के फैसले को ख़ारिज करते हैं, ट्रम्प के उस फैसले को जो ट्रम्प ने 5 दिसम्बर को लिया था की इसराइल की राजधानी के रूप में वह जेरुसलम को मान्यता देते हैं.

शनिवार की रात अल-कूदस की स्थिति पर चर्चा करने के लिए अरब लीग के विदेश मंत्रियों के साथ काहिरा में हुई आपातकालीन बैठक में उन्होंने अमेरिकी प्रशासन को अपना फैसला वापस लेने की बात कही. अल-जुबेइर ने कहा की यह पहले भी चेतावनी दी गई थी की कोई भी घोषणा मुसलमानों को उकसा सकती है और यह शांति प्रक्रिया को खतरे में डाल सकती है.

सऊदी विदेश मंत्री अल-जुबेइर ने कहा की “मेरी सरकार ने अपने निर्णय से पीछे हटने और अंतर्राष्ट्रीय इच्छा का समर्थन करने के लिए अमेरिकी प्रशासन से सम्पर्क किया ताकि फिलीस्तीनी लोग अपने अधिकारों को वापस ले सके. अल-जुबेइर ने कहा की “हम अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को शांतिपूर्ण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के प्रयासों को तेज करने के लिए कहते हैं ताकि स्थायी रूप से इस ऐतिहासिक संघर्ष को समाप्त कर दिया जा सके.”