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एर्दोगान का हमला अमेरिका इसराइल के साथ मिलकर मुस्लिम देशों को बना रहें हैं लक्ष्य

तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान ने कहा कि, “अमेरिका, इसराइल के साथ मिलकर संसाधनों के लिए पाकिस्तान, ईरान व अन्य मुस्लिम देशों को टारगेट बना रहा है.” यह देश प्राकृतिक संसाधनों को प्राप्त करने की इच्छा से प्रेरित हैं और यह इन मुस्लिम देशों में दखल दे रहे हैं.

एर्दोगान ने कहा कि, “हम यह स्वीकार नहीं करेंगे की कुछ देश, अमेरिका और इसराइल ही दो ऐसे देश हैं, जो पाकिस्तान और ईरान के आन्तरिक मामलों में दखल दे रहे हैं.”

पिछले हफ्ते डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान में हो रहे प्रदर्शनकारियों के लिए ईरान की सत्ता के खिलाफ ट्वीट कर कहा था कि, “ईरान के लोग स्वतंत्रता के भूखे हैं, ईरान में बदलवा का समय आ गया है.”, हालाँकि एर्दोगान ने पाकिस्तान मामलों में अमेरिका के हस्तक्षेप की ज्यादा कोई जानकरी नहीं दी, परन्तु यह बयान संभवतः अमेरिका द्वारा पाकिस्तान की सहायता राशि को रोकने के लिए की गयी, जो की एक अरब डॉलर तक की थी.

अमेरिका ने इस्लामाबाद पर तालीबान के खिलाफ कार्यवाही ना करने का आरोप लगाया है और साथ ही पाकिस्तान पर आतंकवादियों को आश्रय देने का आरोप लगाया है.

एर्दोगान ने दावा किया है कि “इसराइल और अमेरिका का इन सभी देशों में अपने स्वयं के संसाधनों में भरपूर भूमिगत धन” बनाने की इच्छा से प्रेरित है.”

एर्दोगान ने कहा की “दोनों देशों ने इन मुस्लिम देशों को लक्ष्य बनाकर लोगों को एक दुसरे के विरुद्ध बदल दिया है और कहा की इनके विनाशकारी परिणाम सीरिया, इराक, मिस्र और फिलिस्तीन में देखें जा सकते हैं.”

एर्दोगान ने कहा की “ऐसे ही अन्य देश हैं, लीबिया, ट्यूनीशिया, सूडान और चाड, जहां अशांति फ़ैल जाती हैं. एर्दोगान ने कहा की “इन देशों में इनकी संपत्तियां हैं, एर्दोगान ने कहा की “हमें दृष्टिकोण बदलना होगा, हमें यह जानना चाहिए”.

ईरान के पब्लिक प्रोसीक्यूटर मोहम्मद जफर मौताज़ेरी ने कहा की “ईरान में अशांति को सक्रीय करने की साजिश पिछले चार सालों से की जा रही थी, मास्टरमाइंड की पहचान अमेरिका का नागरिक, पूर्व CIA ऑपरेटिव माइकल एंड्रिया के रूप में हुई है.

इसके अलावा इस सप्ताह यूएस में ईरान के राजदूत घोलामाली खोस्रू ने अमेरिका प्रशासन की ईरानी मामलों में हस्तक्षेप करने की निंदा की. इस ही सप्ताह के शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के राजदूत ने ईरान की परिस्तिथियों पर संयुक्त राष्ट्र में एक बैठक आयोजित की थी. रूस ने भी ईरान में अमेरिका के हस्तक्षेप की निंदा की.

इस हफ्ते की शुरुआत में, रूस के विदेश मंत्रालय ने ईरान के मामलों में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ चेतावनी दी थी जो एक अस्वीकार्य कदम “जो स्थिति को अस्थिर कर सकता है” कहती है.