Home मिडिल ईस्ट सद्दाम हुसैन के आखिरी दिनों के बारे में अमेरिकी सैनिकों ने लिखी...

सद्दाम हुसैन के आखिरी दिनों के बारे में अमेरिकी सैनिकों ने लिखी किताब, खोले कई राज़

मशहूर ईराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन को अमेरिका ने कैद कर लिया था.उसके आखिरी दिनों में जो अमेरिकी सैनिक तैनात थे उन्हें सद्दाम हुसैन के बारे में वे जानकारियां भी हैं जो खुद सद्दाम हुसैन ने उन्हें दीं.उसके अंतिम दिनों में उसकी सुरक्षा में तैनात रहने वाले सैनिकों ने मिलकर एक किताब लिखी है जिसमें उन्होंने सद्दाम हुसैन से जुड़े कई राज़ खोले हैं.

इस किताब के कुछ अंश बड़े ही दिलचस्प हैं. ये सैनिक लिखते हैं कि वो सद्दाम के अंतिम दिन थे जब उन्हें बंकर से पकड़ा गया था. सद्दाम की सुरक्षा में तैनात अमेरिकन सुरक्षाकर्मियों के बच्चों को सद्दाम हुसैन अपनी छोटी-छोटी कहानियां सुनाया करता था.

सद्दाम अपने अंतिम दिनों में अमेरिकी गायिका मेरी जे ब्लिज के गानों को सुना करता था. बार्डेनपर द्वारी लिखी गई किताब द प्रिजनर इन हिज पैलेस के मुताबिक सद्दाम अपने अंतिम दिनों में उदार हो चला था. हंसते हुए सद्दाम बताया करता था कि कैसे वो जहन्नम को भी आनंदपूर्वक देखता था.

सद्दाम को रेडियो सुनने का भी शौक था. यही नहीं अगर मेरी जे ब्लिज के गाने कभी बजते तो थो उसके कदम रुक जाते थे. किताब के मुताबिक ये बड़े आश्चर्य की बात थी कि जिस सद्दाम के पास संगमरमर बड़ी संख्या में संगमरमर के महल थे वो अपने छोटे से कैदखाने में भी खुश था.

2006 में फांसी देने के पहले वो तीन दशक तक इराक पर राज कर चुका था. 69 वर्ष की उम्र में सद्दाम को फांसी दी गई थी. जब सद्दाम के खिलाफ बगदाद में मुकदमा चलाया जा रहा था उस वक्त 551 मिलिट्री पुलिस कंपनी में तैनात अमेरिकी सुरक्षाकर्मी उसकी निगरानी रखते थे. सद्दाम की सुरक्षा में तैनात इन अमेरिकी सिपाहियों को उससे एक रिश्ता कायम हो गया था.

सद्दाम के अंतिम दिनों के बारे में जानकारी देते हुए किताब में बताया गया है कि कैदखाने के बाहरी हिस्सों की गंदगी को साफ करने में उसे आनंद आता था. बदसूरत ढंग से फैले खरपतवार को पानी देने में उसे सुकून मिलता था. लेकिन वो अपने खाने को लेकर फिक्रमंद था. नाश्ते में सबसे पहले वो ऑमलेट लेता था उसके बाद मफिन और ताजे फल खाता था.

अगर ऑमलेट में किसी तरह की खराबी होती थी तो वो खाने से इंकार कर देता था. अमेरिकी सिपाहियों में से तैनात एक के मुताबिक सद्दाम को खाने के बाद मिठाइयां विशेष तौर पर दी जाती थीं. किताब के मुताबिक वो अपनी सुरक्षा में तैनात सिपाहियों के बच्चों को लेकर फिक्र करता रहता था.

अपने पैरेंटिंग टिप को वो उन सिपाहियों से साझा करता था. सद्दाम का मानना था कि बच्चों को अनुशासन में रखना बेहद जरूरी है. अपने बेटे उदै के बारे में बताते हुए सद्दाम ने कहा कि एक बार उसने कोई गंभीर भूल की जिसके बाद वो बहुत क्रोधित हुआ.

दरअसल उदै ने एक पार्टी के दौरान गोलीबारी कर दी थी जिसमें कई लोगों को मौत के साथ साथ कई लोग घायल हो गए थे. मैं अपने बेटे पर बहुत गुस्सा था, क्रोध में मैंने उसकी सभी कारों को जला दिया. सिपाहियों के मुताबिक उदै के पास सैकडों की संख्या में रॉल्स रॉयस, फेरारी और पोर्शे कार थी.

‘सद्दाम हुसैन, द पॉलिटिक्स ऑफ़ रिवेंज’ लिखने वाले सैद अबूरिश का मानना है कि सद्दाम की बड़ी-बड़ी इमारतें और मस्जिदें बनाने की वजह तिकरित में बिताया उसका बचपन था, जहां उसके परिवार के लिए उनके लिए एक जूता तक खरीदने के लिए भी पैसे नहीं होते थे. दिलचस्प बात ये है कि सद्दाम अपने जिस भी महल में सोता था. वो सिर्फ कुछ घंटों की ही नींद लेता था.

सद्दाम के हर महल में फव्वारों और स्वीमिंग पूल की भरमार रहती थी. कफलिन लिखते हैं कि सद्दाम को स्लिप डिस्क की बीमारी थी. सद्दाम हुसैन के सारे स्वीमिंग पूलों की बहुत बारीकी से देखभाल की जाती थी. उसका तापमान नियंत्रित किया जाता था और ये भी सुनिश्चित किया जाता था कि पानी में जहर तो नहीं मिला दिया गया है.

सद्दाम पर एक और किताब लिखने वाले अमाजिया बरम लिखते हैं कि ये देखते हुए कि सद्दाम के शासन के कई दुश्मनों को थेलियम के ज़हर से मारा गया था, सद्दाम को अंदर ही अंदर इस बात का डर सताता था कि कहीं उन्हें भी कोई जहर दे कर न मार दे.

हफ्ते में दो बार उनके बग़दाद के महल में ताज़ी मछली, केकड़े, झींगे और बकरे और मुर्गे के गोश्त की खेप भिजवाई जाती थी. राष्ट्पति के महल में जाने से पहले परमाणु वैज्ञानिक उनका परीक्षण कर इस बात की जांच करते थे कि कहीं इनमें रेडियेशन या जहर तो नहीं है.