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ब्रिटेन में समय पूर्व हुए चुनावों में भारतीयों ने मारी बाज़ी, पहली बार चुने गए पगड़ीधारी

हाल ही में ब्रिटेन में चुनाव संपन्न हुए हैं. इस बार यहाँ चुनाव समय से पहले हुए हैं. इस बार ब्रिटेन के चुनावों में भारतीयों ने भी बाज़ी मारी है. तनमनजीत सिंह धेसी ब्रिटेन के इतिहास में पहली बार पगड़ीधारी सांसद के रूप में चुने गए हैं जबकि प्रीत कौर गिल ब्रिटेन पार्लियामेंट की ऐसी पहली सिख महिला हैं जो सांसद चुनी गई हैं. भारतीय मूल के धेसी और गिल की चुनावों में ये पहली जीत नहीं है. हालांकि यूनाईटेड किंगडम में सिख नेताओं के लिए ये मील का पत्थर जरूर साबित हुआ है.

ब्रिटेन में पिछली बार चुनकर आए भारतीय के संसद सदस्य की संख्या 10 थी. जिनमें से पांच लेबर और पांच कंजर्वेटिव पार्टी से थे. जिन्होंने इन चुनावों में भी अपनी सीटें बरकरार रखी हैं. हालांकि इन चुनावों में 50 ऐसे उम्मीदवार हारे हैं जिन्होंने किसी ना किसी रूप में भारत से अपने संबंध होने की बात कही. जबकि इस बार कुल 12 भारतीय मूल के लोगों ने चुनाव जीतकर इतिहास बनाया है.

तनमनजीत सिंह धेसी और प्रीत कौर गिल दोनों विपक्षी लेबर पार्टी से चुनाव जीते हैं. धेसी स्‍लॉ जबकि गिल बर्मिंघम एजबेस्‍टन से चुनाव जीती हैं. चुनाव ऐसे समय में हुए जब प्रधानमंत्री थेरेसा मई ने करीब 7 सप्ताह पहले समय से पहले चुनाव कराने का निर्णय लेना लिया था. गिल ने बर्मिंघम एजबेस्‍टन सीट से अपने विरोधी को 6,917 वोटों से हराया. चुनाव जीतने के बाद गिल ने कहा कि मुझे इस बात की खुशी है कि एजबेस्‍टन से सांसद बनने का मौका मिला क्‍योंकि मेरा यहां जन्‍म और परवरिश हुई है.

जबकि तनमनजीत सिंह धेसी उर्फ टैन भी लेबर पार्टी से ही जुड़े हैं. धेसी ने अपने विरोधी तकरीबन 17 हजार मतों से हराया. हालाँकि ये बात भी गौरतलब है कि ब्रिटेन में समय से पूर्व हुए चुनावों में किसी को भी स्‍पष्‍ट बहुमत नहीं मिला है. सत्‍तारूढ़ कंजरवेटिव पार्टी की नेता और प्रधानमंत्री थेरेसा मई का समय से पहले चुनाव कराने का दांव उलटा पड़ गया है. दरअसल टेरीजा मे ने समय से तीन साल पहले ही मध्‍यवाधि चुनाव कराने का फैसला लिया था.

पिछले साल ब्रेक्जिट के मुद्दे पर हुए जनमत संग्रह की पृष्‍ठभूमि में यह फैसला लिया गया था. चुनाव से पहले माना जा रहा था कि कंजरवेटिव पार्टी को स्‍पष्‍ट बहुमत मिलेगा लेकिन चुनाव पूर्व अनुमानों के विपरीत विपक्षी लेबर पार्टी ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है. दोनों प्रमुख दलों से भारतीय मूल के कई भारतीय उम्‍मीदवारों ने ना सिर्फ जीत हासिल की है बल्कि इतिहास भी रचा है.