Home एशिया ज़िंदगी और मौत की जंग लड़ रहे है रोहिंग्या शरणार्थी

ज़िंदगी और मौत की जंग लड़ रहे है रोहिंग्या शरणार्थी

source: AFP

जेनेवा – UN मानवीय रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य वर्ष के मानसून के मौसम की शुरुआत के बाद बांग्लादेश में 100,000 से ज़्यादा रोहिंग्या शरणार्थी गंदे शिविरों में फसें हुए है और अब उनके सिर पर भूस्खलन होने का खतरा मंडरा रहा है.

बांग्लादेश के कॉक्स बाजार इलाके में 900,000 से ज्यादा रोहिंग्या हैं, म्यांमार में 688,000 लोग हिंसा की वजह से अगस्त के आखिर में यहाँ आए थे. सहायता श्रमिक कहते हैं कि नए शरणार्थियों के लिए यह शिविर रहने योग्य नहीं है, शिविरों के हालात बहुत खराब है.

UN की रिपोर्ट के मुताबिक, “भूस्खलन और बाढ़ के खतरे को देखते हुए इस वक़्त कम से कम 100,000 लोग गंभीर खतरे में हैं और नए इलाकों या पड़ोस में रहने वाले इलाकों में स्थानांतरित करने कि ज़रूरत है.”

“क्षेत्र की कमी मुख्य रूप से इस क्षेत्र के लिए चुनौती है क्योंकि शिविर साईट बेहद भीड़भाड़ वाली हैं, जहाँ किसी भी तरह की सुविधाओं के लिए कोई जगह नहीं होती है. भीड़ और गंदगी की वजह यहाँ कई जानलेवा बिमारियों ने अपनी पकड़ मज़बूत कर ली है.”

source: Arab News

हालांकि हैजा टीकाकरण कार्यक्रम शुरू कर दिया गया है क्योंकि जांच में 4,865 शरणार्थियों की हैजा की पुष्टि की गयी है, कुछ शरणार्थी डिप्थीरिया जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे है और अब तक 35 की मौत हो चुकी है.

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन ने डिप्थीरिया से बचाव के लिए 500,000 से ज़्यादा रोहिंग्याओं को टीका लगाया है और शनिवार को स्वास्थ्य कर्मियों ने 350,000 बच्चों को एक दूसरी खुराक दी. डब्ल्यूएचओ में एंटी-टॉक्सिन की 2,500 खुराक भी हैं, जो बहुत तेज़ी से फ़ैल रही है.

UN की रिपोर्ट के मुताबिक, एक नई स्वास्थ्य चिंता पैदा हुई है मम्प्स. पिछले कुछ हफ्तों में मामलों में बढ़ोतरी आई है और रोहिंग्या शरणार्थियों अत्यधिक संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा मंडरा रहा है.

UN की रिपोर्ट के मुताबिक, “बाढ़ और भूस्खलन के जोखिम का खतरा मंडरा रहा है.” आगामी मानसून के मौसम कि वजह से बाढ़ और भूस्खलन से हालत और खराब हो सकते है. मानवाधिकार समूह शरणार्थियों को बचाने के नए शिविरों का निर्माण कर रहे है.