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टीवी एंकर पर लगा नफरत फैलाने का आरोप, हुई तीन हत्याएं, सरकार ने उम्रभर के लिए किया प्रतिबंधित

पाकिस्तानी अदालत ने पाकिस्तान के एक टेलीविज़न होस्ट आमीर लियाकत हुसैन को टेलीविज़न, सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया पर काम करने पर प्रतिबन्ध लगा दिया है.

इस्लामाबाद के उच्च न्यायलय के न्यायाधीश शौकत अजीज सिद्दीकी याचिकाकर्ता मुहम्मद अब्बास के वकील शोएब रज्जाक द्वारा प्रस्तुत सबूतों को मध्य नजर रखते हुए इस केस को अंतिम चरण में ले गए,  रजाक ने अदालत से कहा कि हुसैन के पास कोई इस्लामी डिग्री नहीं है और फिर भी खुद को ‘आलिम’ (धार्मिक विद्वान) कहता है.”

आमिर लियाकत हुसैन एक प्रसिद्ध पाकिस्तानी टेलीविजन, पूर्व राजनेता और स्व-घोषित धार्मिक विद्वान हैं, वह 2002 से 2007 तक पाकिस्तान की राष्ट्रीय सभा के सदस्य रहे थे और उन्होंने 2007 में इस्तीफा देने तक धार्मिक मामलों के राज्य मंत्री के रूप में काम किया था. तब से, वह मीडिया में शामिल हो गए और रेडियो और टीवी शो की मेजबानी कर रहें हैं, उन्होंने एक लोकप्रिय निजी टीवी चैनल जियो टीवी पर “आलिम ऑनलाइन” की मेजबानी के बाद लोकप्रियता पाई.

हुसैन पर घृणा फैलाने का आरोप है, लियाकत ने देश में सामाजिक और धार्मिक विभाजन के लिए कई सालों तक टीवी शो का इस्तेमाल किया, याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि टेलीविजन के प्रचारक ने फतवा सौंप कर कई लोगों के जीवन को खतरे में डाल दिया

चार विवाद

रमजान तोहफा 

रमजान ट्रांसमिशन के लाइव कवरेज के दौरान चाइल्डलेस दंपतियों को बच्चों को देने के लिए 2013 में हुसैन ने लोगों के बीच आक्रोश फैलाया, परित्यक्त बच्चों को एक स्थानीय एनजीओ में पाया गया, हुसैन का माता-पिता को ‘रमजान उपहार’ देने के लिए तिरस्कार किया गया था, उन्होंने अपने इस कार्य को दान कहा और कहा की “क्रिसमस में सभी उपहार देने के लिए सांता क्लॉज है, ईसाइयों के लिए यह महत्वपूर्ण है वेसे ही हमारे लिए रमजान एक विशेष समय है इसलिए लोगों को खुश करने और उन्हें इनाम देने के लिए यह महत्वपूर्ण है.

एम्नेस्टी इंटरनेशनल द्वारा हुसैन की निंदा

मार्च 2017 में, वैश्विक मानवाधिकार संगठन एम्नेस्टी इंटरनेशनल ने पत्रकारों, ब्लॉगर्स और सामाजिक कार्यकर्ताओं के जीवन को खतरे में डालने के लिए हुसैन के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के लिए पाकिस्तान सरकार की आलोचना की, पूर्व गृह मंत्री चौधरी निसार को एक खुले पत्र में, एम्नेस्टी ने पत्रकारों, ब्लॉगर्स और अन्य मानवाधिकार रक्षकों के उत्पीड़न, धमकियों और हिंसा से जुड़े जीवन के अधिकारों और अधिकारों की रक्षा के लिए तेजी से कार्रवाई करने के लिए सरकार से कहा था.

अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ घृणित टिप्पणी

2008 में, पाकिस्तान में सबसे ज्यादा देखे गए टीवी चैनल टेलीविज़नलिस्ट आमिर लियाकत हुसैन पर सुबह के टीवी शो में मौलवियों के पैनल के साथ एक अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ घृणित टिप्पणी और धार्मिक कर्तव्य के एक अधिनियम के रूप में हत्या पर चर्चा किये जाने पर लोगों ने अमिर की आलोचना की , एक सार्वजनिक मंच पर कुख्यात टिप्पणियों को प्रसारित करने के लिए हुसैन और जियो टीवी की गंभीर आलोचना की गई थी.

अपवित्र भाषा का उपयोग

2011 में, एक विवादास्पद विडियो में आमिर ने कुछ अपमानित भाषा का इस्तेमाल किया था और इस विडियो में उन्हें अपने धर्म का मजाक उड़ाते हुए भी दिखाया गया. इस लीक वीडियो ने पाकिस्तान के मीडिया उद्योग में एक बड़ा विवाद फैलाया, जिसमें एक टीवी होस्ट का एक अकल्पनीय पक्ष खुलासा था जिसे एक धार्मिक विशेषज्ञ माना जाता था, अपने बचाव में, हुसैन ने टीवी चैनल पर आरोप लगाया कि उसने अपनी साख को भंग करने के लिए कथित फर्जी वीडियो बनाने और कहा कि वीडियो “सिंक्रनाइज़ेशन के स्वामी” द्वारा संपादित और डब किया गया होगा.