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म्यांमार में सैनिकों ने फिर जलाए सैकड़ों मुस्लिम गाँव, महिलाओं के साथ बलात्कार: एचआरडब्लू रिपोर्ट

source- daily sabha

world news arabia published date : 19-December-2017 time : 12:34

मंगलवार को ह्यूमन राइट वाच की एक रिपोर्ट जारी हुई है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है की “इस साल म्यांमार सैनिकों ने राखीन प्रान्त में सैकड़ों अल्पसंख्यक मुस्लिम औरतों का बलात्कार किया था और उन्हें मार दिया था”

25 अगस्त को पुलिस दल पर घातक उग्रवादी हमले के जवाब में म्यांमार सैनिकों ने “क्लियरेंस ऑपरेशन” का शुरू करने के बाद तुला गाँव से नरसंहार करना शुरू कर दिया था.

अब तक 655,000 रोहिंग्या बांग्लादेश चले गए, रिपोर्ट में रोहिंग्या लोगों के साथ बलात्कार, नरसंहार आदि हिंसा शामिल है. एचआरडब्ल्यू के एशिया निर्देशक ब्रैड एडम्स ने कहा की “म्यांमारी सैनिकों का व्यवहार बहुत क्रूर था, उन्होंने कहा की सैनिकों ने बहुत ही क्रूरता से रोहिंग्या महिलाओं का बलात्कार किया, यह सब पहले से ही प्लान किया हुआ था”.

इस रिपोर्ट को उन 18 लोगों के इंटरव्यू के बाद जारी किया गया, जो बांग्लादेश भाग गए थे और जिनके साथ भी बलात्कार हुआ था.

ह्यूमन राईट वाच की रिपोर्ट के मुताबिक सैनिकों ने बलात्कार करने के बाद महिलाओं को मार दिया जिसके बाद जातीय राखीन ग्रामीणों की मदद से उन्हें जलाकर फेंक दिया गया.

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ह्यूमन राइट्स वॉच ने दावा किया है की “सैटेलाइट इमेज देखने पर साफ़ दिख रहा है की हज़ारों शरणार्थियों के म्यांमार लौटने पर दर्जनों रोहिंग्या गांवो को जला दिया गया है”

म्यांमार ने बांग्लादेश के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया है और म्यांमार सरकार ने कहा था की अब हिंसा बंद हो गई है और रोहंग्या सुरक्षित रूप से म्यांमार लौट सकते हैं, लेकिन अभी भी कई गांवो को नुकसान पहुचाया जा रहा है, और इसके मामले तब से ही कुछ ज्यादा ही सामने आ रहे हैं जब से कुछ रोहिंग्या वापस गए हैं.

बांग्लादेश और म्यांमार ने पिछले चार महीनों में म्यांमार से पलायन करने वाले अनुमानित 655,000 शरणार्थियों को वापस म्यांमार भेजने की प्रक्रिया शुरू की और 23 नवंबर को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, एचआरडब्लू ने कहा है की “बर्मा के सैनिकों, पुलिस और लड़ाकों पर सैकड़ों गांवों, सामूहिक बलात्कार और महिलाओं और बच्चों की हत्या का आरोप लगाया गया है.

एचआरडब्लू ने कहा कि अक्टूबर और नवंबर में 40 गांवों में आग लगने और इमारत के विनाश के संकेत वाली सेटलाइट इमेज बताती हैं की “रोहिंग्या अभी भी वापस लौट कर सुरक्षित नहीं हैं”.