Home एशिया राजस्थान विडियो हत्याकांड- इंसानियत के निम्नतर स्तर पर हिंदी मीडिया

राजस्थान विडियो हत्याकांड- इंसानियत के निम्नतर स्तर पर हिंदी मीडिया

जिस दिन भारत में बाबरी मस्जिद की बरसी मनाई जा रही है और लोग इसे काले दिवस के रूप में मना रहे थे वहीँ एक विडियो ने यह साबित कर दिखाया की इन 25 वर्षों में भारत में कितना बदलाव आया. लगातार एक समुदाय विशेष के खिलाफ फैलाई जा रही नफरत की चिंगारी अब बम बन चुकी है और दादरी के अखलाक हत्याकांड में उसकी गूँज सुनाई पड़ी. दादरी में घर से खींचकर मारे गये अखलाक को लेकर मीडिया में काफी चर्चाएँ की गयी, लेकिन हिंदी मीडिया का एक तबका ऐसा भी था जो ख़ामोशी से ही सही लेकिन इस हत्याकांड को जस्टिफाई करने में पुरजोर से लगा हुआ था वहीँ रही सही कसर मुख्य आरोपी की मौत के बाद उसके शव पर तिरंगा डालकर कर दी गयी.

ध्यान रहे समाज और राजनीती के बीच सूचनाओं के आदान प्रदान को ही मीडिया ही मध्य्नातर की भूमिका निभाता है. समाज, मीडिया और राजनीती इन तीनो तबकों ने अखलाक हत्याकांड में हत्यारों का साथ दिया. जहाँ मीडिया ने तुरंत गौमांस को लेकर हत्या कहा (हालाँकि रिपोर्ट में भैंस का मीट निकला) वहीँ समाज ने आरोपी के शव पर तिरंगा डालकर ‘साम्प्रदायिक मानसिकता’ को राष्ट्वाद का नाम देने की कोशिश की वहीँ राजनीती ने आरोपी के परिजनों को सरकारी नौकरी देकर उसपर अपनी मुहर लगा दी.

इसी तरह फिर एक बार हिंदी मीडिया ने साबित कर दिया की वो पहले कातिल का नाम देखती है और फिर रिपोर्टिंग करती है, राजस्थान विडियो हत्याकांड में जिस तरह मात्र विडियो देखकर रिपोर्टिंग की गयी उससे हिंदी मीडिया की साख पूरी तरह गिर चुकी है. क्या वो सच है जो हत्यारा बोलता है ?. मीडिया ने बार बार हत्यारे के भाषण को दिखाकर हत्यारे के पक्ष को जनता के सामने रखने की पुरजोर कोशिश की.

जब यह खबर मीडिया में आई तो दुनियाभर में बुद्धिजीवी वर्ग सकते में आ गया की क्या भारत में कुछ लोगो ने आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठन को भी पीछे छोड़ दिया है. नफरत की इस हत्या को लव जिहाद का रूप देने की जिस तरह कोशिश की गयी वो साबित करता है की हिंदी मीडिया धर्म देखकर यह तय करती है की ‘असल पीड़ित’ कौन है?.

मृतक की एक बेटी की अगले महीने शादी होनी थी

आइये इस हत्याकांड और उसके बाद मीडिया के रुख पर थोडा प्रकाश डालते है.

भारत के केरल से लव जिहाद का जिन्न बोतल से बाहर निकला और कुछ ही दिनों में देखते ही देखते सभी हिन्दुत्ववादी संगठनों के सर चढ़कर बोलने लगा, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हिन्दू युवा वाहिनी के झंडे तले काफी विरोध प्रदर्शन हुए तथा हिंसा की कुछ घटनाये भी सामने आई लेकिन इस पर बैठी जांच से यह साबित हो गया की लव जिहाद नाम की कोई भी साजिश नही रची जा रही. कुछ समय के लिए मुद्दा शांत हुआ लेकिन फिर जंगल की आग की तरह फैलता रहा. केंद्र में बैठी सरकार के कुछ नेताओं ने भी रुक रूककर हवा देने की होड़ मची रही.

हत्यारे दो तरह के होते है एक वो होता है जिसके पास हत्या का कोई कारण नही होता उसे साईको किलर कहा जाता है बाकी दूसरी तरह के हत्यारे के पास हत्या का कारण होता है यह निजी भी हो सकता है या नफरत भरा भी लेकिन उसकी नज़र में हत्या का एक मकसद होता है और वो उसे जस्टिफाई कर सकता है. जैसे की बॉलीवुड की फिल्मों में दिखाया जाता है की कैसे हीरो जवान होकर अपने बाप की हत्या का बदला लेता है और हम उस हत्यारे पर तालियाँ पीटते हैं. हत्या ..हत्या होती है चाहे जैसे भी की जाए लेकिन फिल्म में जिस तरह हीरो का पक्ष लेकर कहानी को आगे बढ़ाया जाता है और दर्शकों के सामने हत्या को जस्टिफाई किया जाता है. ठीक वैसा ही हिंदी मीडिया ने करना शुरू कर दिया.

राजस्थान के राजसमन्द में जब यह घटना घटी तो तुरंत हिंदी मीडिया में इस तरह की ख़बरें आने लगी ” लव जिहाद- मुस्लिम शख्श को मारकर जलाया, लव जिहाद – राजस्थान में युवक को काटकर टुकडें किये फिर आग लगाई, लव जिहाद में हुई मुस्लिम युवक की हत्या.

यह सुर्खियाँ से पाठकों के दिमाग पर इस तरह प्रहार किया जाता है की राजस्थान में एक हत्या हुई है जिसका कारण लव जिहाद है. 

किस तरह रचा जाता है यह घिनौना खेल

जिस दिन यह विडियो वायरल हुआ तथा इसकी न्यूज़ आई उसी शाम को दिल्ली में एक महिला को शराब माफियाओं ने नंगा करके घुमाया, क्या आपमें से किसी ने शराब माफियाओं के ब्यान को लेकर ख़बरें पढ़ी ..क्या ऐसी कोई हैडिंग सामने आई की “शराब व्यापारियों की धंधा चौपट करना चाहती थी महिला, मिली सज़ा”?. क्या कोई ऐसी खबर सामने आई की ” विक्रेताओं के बीबी बच्चों मर जाते भूख से, व्यापारियों ने किया महिला से संघर्ष”? उन माफियाओं के पास भी इस गंदे काम को करने का कारण मौजूद है वो भी कह सकते है की शराब बेचकर हम अपने परिवार को पालते हैं और यह महिला हमारा धंधा चौपट करना चाहती थी, अगर रोक लगवानी ही है तो शराब बेचने पर ही रोक लगाओ, हम कुछ और व्यापर कर लेंगे.

कहने का मतलब यह है की हर क्राइम का कोई ना कोई कारण होता है ज़ाहिर सी बात है आपको ऐसी कोई भी खबर पढने को नही मिली होगी तो फिर हिंदी मीडिया ने हत्यारे हैवान के पक्ष की ख़बरों को चलाना क्यों शुरू कर दिया. क्यों बताया उसकी मानसिकता क्या है? क्यों बार बार लव जिहाद का नाम देकर उसके हैवानियत के नंगे नाच पर पर्दा डालने की कोशिश की गयी? क्यों नही मृत व्यक्ति को लेकर ख़बरें बनायीं गयी की “अगले महीने लड़की की शादी थी जिसके लिए वो पैसे कमाना चाहता था नफरत की आग में जला दिया गया, क्यों नही ऐसा बताया गया की तीन बेटियों के बाप को ज़हर बुझे दिमाग ने काटकर जलाया”.

मीडिया क्यों करती है ऐसा ?

जब को साइको किलर हत्या करता है तो उससे सिर्फ दो परिवार प्रभावित होते है लेकिन जब किसी हत्यारे के पास हत्या का राजनीती कारण हो तो वह समाज को प्रभावित करती है. जैसे की इस हत्या में हुआ, यह मात्र संयोग नही कहा जा सकता की हत्या का लिए 6 दिसम्बर का दिन चुना गया, उस हत्याकांड की घिनौनी विडियो बनायीं गयी और वायरल की गयी, उसके बाद हत्या के कारण को बताया गया जो की राजनीती से प्रेरित था बाकी काम हिंदी मीडिया ने कर दिया. हो सकता है इस हत्याकांड में कोई गहरी साजिश हो या यह मात्र एक संयोग हो लेकिन जिस तरह मीडिया ने इंसानियत का निम्न स्तर दिखाया है उससे नही लगता हिंदी मीडिया दुसरे पक्ष को सामने आने देगी. समाज की हवा तभी दूषित होती है जब ज़हरीली हवा को मीडिया के ज़रिये लोगो तक पहुंचाया जाता है, जहाँ पत्रकार का कर्तव्य पीड़ितों से हमदर्दी, सरकार की आलोचना होना चाहिए.