Home एशिया काबुल धमाके के पीछे साम्राज्यवादी ताक़तें: अफगानी राजनीतिक विश्लेषक

काबुल धमाके के पीछे साम्राज्यवादी ताक़तें: अफगानी राजनीतिक विश्लेषक

अफगानिस्तान के समाचार पत्र संपादक और राजनीतिक विश्लेषक ने कहा हैः काबुल धमाके के प्रत्यक्ष जिम्मेदार चाहे कोई भी व्यक्ति या संगठन हो लेकिन इस घटना की असली जिम्मेदार साम्राज्यवादी ताकतें हैं।

वीज़ा समाचार पत्र के संपादक और राजनीतिक विश्लेषक मोहम्मद जुबैर शफीकी ने पेरिस टुडे को दिए साक्षात्कार में काबुल में हुए भयानक हमले के बारे में कहाः यह बहुत बड़ा अपराध है विशेषकर तब जब की इन्सानियत के शत्रुओं ने यह कार्य रमजान जैसे पवित्र महीने में किया है और के प्रत्यक्ष जिम्मेदार चाहे कोई भी व्यक्ति या संगठन हो लेकिन इस घटना की असली जिम्मेदार साम्राज्यवादी ताकतें हैं, जिन्होंने आतकंवाद को समाप्त करने के बहाने 17 साल पहले अफगानिस्तान में प्रवेश किया जिसका नतीजा यह हुआ कि आतंकवाद तो समाप्त नहीं हुआ बल्कि उन्होंने दाइश जैसे नए आतंकवादी संगठनो को पैदा कर दिया।

शफीकी के अनुसार जब कि आतंकवादी संगठन दाइश ने इस धमाके की ज़िम्मेदारी स्वीकार की है लेकिन अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा विभाग ने इसके लिए पाकिस्तान के इस्तेखबारात संगठन और हक्कानी नेटवर्क पर इन धमाके का आरोप लगाया है जो यह दिखाता है कि यह आरोप बिना किसी साक्ष्य के हैं और यह केवल लोगों को जवाब देने से बचने के लिए हैं।

उन्होंने कहा कि काबुल में होने वाले धमाके की प्लानिक बहुत बड़े स्तर पर की गई थी, बल्कि उनके अनुसार विस्फोटक पदार्थ से भरा टैंकर एक डेप्लोमेटिक क्षेत्र में पहुँचाना बड़े स्तर पर बिना समर्थन के संभव नहीं था, ध्यान देने वाली बात यह है कि इस धमाके में जिस टैंकर का प्रयोग किया गया है वह एक देश के दूतावास के लिए गटर को साफ करने के लिए भी प्रयोग किया जाता था, और टैंकर के पास उस दूतावास का कार्ड भी था, वरना इस क्षेत्र में टैंकर या किसी भी बड़े वाहन के प्रवेश पर प्रतिबंध है।

शफीकी ने अफगानिस्तान सरकार की कठोर निंदा करते हुए कहा कि इस सरकार ने लगभग पिछले तीन सालों से अमरीका से साथ सुरक्षा करार पर हस्ताक्षर कर रखे हैं और इस करार के अनुसार अमरीका जो चाहता है करता है, अमरीकियों ने बड़े बड़े सैन्य अड्डों का निर्माण किया है, और इन अड्डों में उनके सैनिक सुरक्षित हैं और इन्ही अमरीकियों को कारण इस समय अफगान बल और अफगानिस्तान के आम नागरिक आतंकवादी हमलों के शिकार हो रहे हैं, लेकिन अफगानिस्तान सरकार में इनती हिम्मत नहों है कि वह अमरीका से पूछ सके कि वह सुरक्षा करार के अनुसार अपने वादे का पालन क्यों नहीं कर रहा है?

इस संपादक के अनुसार यह सरकार अफगानी नागरिकों की सरकार नहीं है बल्कि यह अमरीका की बनाई हुई सरकार है जो अपने आका के विरुद्ध नहीं जा सकती है, अफगानिस्तान के लोगों और धार्मिक एवं राजनीतिक शख्सियतों को देश की चिंता करनी होगी और अगर उन्होंने चिता न की तो देश में कोई बड़ा सुधार नहीं होने वाला है और अगर अफगानिस्तान की सत्ता में बदलाव के लिए एक रास्ता नहीं बनाया गया तो अफगानिस्तान में सुरक्षा की स्थिति इससे भी बदतर हो जाएगी।

उन्होंने कहाः अफगानिस्तान में सुरक्षा को जो स्थिति है वह विश्व युद्ध की निशानियां है लेकिन ब्रेस्लेस में होने वाली बैठक में इस विषय पर कोई ध्यान नहीं दिया गया सिवाए इसके कि अफगानिस्तान में कुछ हज़ार और सैनिकों के भेजे जाने का फैसला कर दिया गया और यह भी केवल युद्ध की स्थिति को बनाए रखने के लिए किया गया है न कि शांति के लिए।

उन्होंने कहा कि दाइश जिसके बारे में दो साल पहले तक कोई जानता भी नहीं था उसने पहले पूर्वी और दक्षिणी अफगानिस्तान में सर उठाया और इस समय वह उत्तर और पश्चिम में भी फैल गया है और इस समय वह बड़े बड़े हमलों की जिम्मेदारी स्वीकार कर रहे हैं जो दिखाता है कि साम्राज्यवादी शक्तियां दाइश के लिए बड़े पैमाने पर प्रचार कर रही हैं ताकि धीरे धीरे इसको तालेबान के स्थान पर बिठा सकें।

शफीकी के अनुसार अमरीका यह कार्य केन्द्रीय एशिया रूस और चीन के शांत करने विशेषकर चीन की आर्थिक परियोजनाओं को विफल करने के लिए यह खेल खेल रहा है।