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बद से बदतर होती हालत, अब रोहिंग्या लड़कियां बेचीं जा रही है भारत के बाजारों में

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बंधुआ मजदूर में बंधे हुए पुरुषों और महिलाओं को शादी के लिए तस्करी के मामले भी भारत में सामने आना शुरू हो गए हैं जब वे भागने में कामयाब रहे थे या उन्हें बचाया गया था और नूह में रोहिंग्या बस्तियों में बसाया गया था. रोहंग्या ने भारत में पहले साल में पलायन करना शुरू कर दिया था और अब देश में करीब 40,000 रोहिंग्या मुस्लिम रहते हैं.

रहीमा ने 2012 में बांग्लादेश में एक शरणार्थी शिविर में अपने पिता से मिलने के लिए “घास और धान के खेतों के बड़े तारों से घिरे” म्यांमार में अपना घर छोड़ा था.

रहीमा ने बताया कि, मेरे घर पर खाना भी नहीं था और मेरी मां ने सोचा कि अगर मैं अपने पिता के साथ ही रहूँ तो येही मेरेलिए बेहतर होगा, अब मेरी उम्र 22 साल है.” लेकिन शिविर में मेरी रिश्तेदार ने मुझे एजेंट को बेच दिया, उन्होंने मुझे बताया है की वह मझसे भारत में शादी कर लेगा.

15 साल की उम्र में, रहीमा ने म्यांमार के राखिने राज्य में अपना घर छोड़ा था. रहीमा ने दो अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार कर दीं थी भारत में एक शख्स से शादी करने के लिए बेच दिया गया और इस शख्स की उम्र उनकी पिता से बस थोड़ी ही कम है. वह एजेंट से पूछता है कि अगर मैं पहले से शादीशुदा हूँ. मैं शादीशुदा नहीं हूँ इसलिए उसने मझे खरीदने के 20,000 रुपीय दिए. शादीशुदा औरतें 15,000  रुपए में बिकती है.

रहीम ने कहा कि जिससे मेरी शादी हुई, वो शख्स में पिता से सिर्फ कुछ साल छोटा है. वह मुझे बिजली कि तारों से मारता है और मझे छोड़ता भी नहीं है. वो कहता है कि उसने मुझे ख़रीदा है. रहीमा के पति ने पिछले पांच सालों तक उसके साथ दुर्व्यवहार किया. जब वह अपने दो बच्चे के साथ पांच महीने की गर्भवती थी, तब उसे छोड़ दिया था.

बढ़ती शरणार्थी संकट में पिछले साल अगस्त के आखिर से लगभग 660,000 रोहिंग्या म्यांमार के पश्चिमी राखिने राज्य से भाग कर सीमा पर करके बांग्लादेश चले गये थे. रोहंग्या के उग्रवादियों ने सुरक्षा पदों पर हमला किया था.

वह बांग्लादेश में पहले से रह रहे हजारों रोहंगिया मुस्लिमों में शामिल हो रहे हैं. इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (आईओएम) ने कहा है कि नए शरणार्थीयों में अधिकतर महिलाएं और बच्चों शामिल है , जिन्हें मानव तस्करी का खतरा हैं.

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“मैं शादी की बात सुनते ही एकदम सुन्न रह गयी थी. मैं एजेंट के साथ थी और कोलकाता पहुंच गयी.  मुझे कोई भारतीय भाषा भी नहीं आती थी, लेकिन मैंने सोचा कि मैं सुरक्षित रहूंगी, उन्होंने उत्तरी भारतीय राज्य हरियाणा के नूह के अपने घर में यह सभी बातें हिंदी में बताई.

“सुरक्षा सबक”

बांग्लादेश का अराजक शरणार्थी शिविर ऐसे एजेंटों के लिए कमाई का क्षेत्र हैं जैसे रहीमा को खरीदा और बेचा गया.  सौदागरों के लिए शादी तो बस एक बहाना है असल में उन्हें शिविर के महिलाओं के साथ दुर्व्यहवार करना होता है.

सहायता और विकास संगठन BRAC के प्रवक्ता इफ्फ़त नवाज ने कहा, “लड़कियों और माता-पिता के लिए शादी बड़ी चीज़ है क्योंकि वह अपनी बेटियों के लिए बेहतर आर्थिक स्थिरता  देखते हैं. जिसके बदले में उन्हें सिर्फ धोखा मिलता है.”

दिसंबर में, BRAC स्वयंसेवकों ने कॉक्स बाजार में शरणार्थी बस्तियों में युवा लड़कियों जागरूक किया गया था जिसमें उन्हें जनबियों के बीच सुरक्षित रहने के बारे में जानकारी दी गयी थी. लड़कियों को 12 सत्रों में प्रशिक्षित किया जाता है, जिनके लिए उन्हें ध्यान से देखने की ज़रूरत होती है, अगर कोई उन्हें गलत तरीके से छूए, पैसे, खाना या घर का लालच दे, और असली मानवीय श्रमिकों और तस्करों में अंतर करने के तरीके सिखाये गये.

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नवाज़ ने कहा, “लड़कियों के गायब होने की कई घटनाएं सामने आई हैं. उनका भारत और नेपाल में अवैध व्यापार किया जा रहा है. हमने इस जोखिम को कम करने के लिए इस कार्यक्रम को शुरू किया है.”