Home एशिया एंजेला मर्केल ने किया अफगानिस्तान में जर्मन सैनिक बढ़ाने से साफ़ इनकार

एंजेला मर्केल ने किया अफगानिस्तान में जर्मन सैनिक बढ़ाने से साफ़ इनकार

एंजला मार्केल ने नाटो प्रमुख स्टोलटनबर्ग के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जर्मनी, उत्तरी अफगानिस्तान में नाटो प्रशिक्षण परियोजना जारी रखेगा
एंजला मार्केल ने नाटो प्रमुख स्टोलटनबर्ग के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जर्मनी, उत्तरी अफगानिस्तान में नाटो प्रशिक्षण परियोजना जारी रखेगा, लेकिन इस देश में अपने सैनिकों की संख्या में वृद्धि नहीं करेगा और न ही हम इस देश में आईएस से मुकाबला करना चाहते हैं।

गौरतलब है कि मार्केल दिसंबर में चौथी बार इस देश के चुनाव में भाग ले रही हैं, जबकि बहुत से जर्मन नागरिक अपने देश द्वारा दूसरे देशों में सैन्य हस्तक्षेप और उनके सैनिक और उनके सैन्य उग्रवाद और राष्ट्रवाद पर आधारित इतिहास के देखते हुए मार्केल के इस बयान को संदेह की नज़र से देखते हैं।

एंजला मैर्केल ने नाटो प्रमुख स्टोलटनबर्ग के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा है कि: हम देखेंगे कि नाटो के यूरोपीय संघ के अफगानिस्तान में अधिक सेना भेजने के क्या परिणाम निकलेंगे।

लेकिन उन्होंने इस बात की ओर भी इशारा किया है कि बर्लिन इस काम में योगदान के लिए तैयार नहीं है, और बताया कि: मेरा मानना है कि हमें वहाँ अपने कौशल बढ़ाने के लिए नहीं जाना चाहिए बल्कि उत्तरी अफगानिस्तान में शांति बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए।

इसी तरह स्टोलटनबर्ग ने कहा: नाटो की अफगानिस्तान में उपस्थिति के बारे में कुछ सप्ताह में फैसला किया जाएगा। और कहा कि: नाटो, अफगानिस्तान में युद्ध के इरादे से नहीं जाएगा बल्कि हम सैन्य प्रशिक्षण और परामर्श के लिए जाएंगे।

उन्होंने उत्तरी अफगानिस्तान में जर्मनी की भूमिका की सराहना की और कहा: जब भी सेना की संख्या में वृद्धि का फैसला होगा तो नाटो अपने सभी सहयोगियों से इसमें भाग लेने की मांग करेगा।

मार्केल ने स्टोलटनबर्ग को स्पष्ट रूप से कहा है कि अमेरिका के आग्रह के बावजूद उनका देश, आईएस के खिलाफ विश्व मुकाबले में अपनी भूमिका और अधिक नही बढ़ाएगा। मार्केल ने संवाददाताओं से कहा कि: मैं बहुत स्पष्ट कह रही हूँ कि अगर ऐसा फैसला किया गया तो जर्मनी अपनी गतिविधियों में अधिक वृद्धि नहीं करेगा।

स्टोलटनबर्ग ने जर्मनी और अमरीका के बीच रक्षा खर्च में मतभेद के बारे में कहा: नाटो सदस्यों ने 2014 में यह समझौता नहीं किया कि वह अपने सैन्य जीडीपी दो प्रतिशत तक पहुंचा दें।

उन्होंने कहा: हम ने यह वादा किया था कि हम अपने सैन्य खर्च को कम करेंगे, और धीरे धीरे उसे दो प्रतिशत तक पहुंचा देंगे। उन्होंने कहा: जर्मनी और अन्य यूरोपीय सहयोगियों ने इस पर काम करना भी शुरू कर दिया है।

गौरतलब है कि अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने जर्मनी पर आपत्ति जताई है कि वह आत्मरक्षा में कम खर्च कर रहे हैं, और शायद नाटो की बैठक में यह विषय महत्वपूर्ण होगा। मार्केल ने कहा कि जर्मनी अपने सैन्य खर्च भी जरूरत के अनुसार बढ़ाएगा, और अब वे अभी इस कदम को जरूरी नहीं समझती हैं।