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तुर्की और सऊदी अरब के बीच हथियार समझौता हुआ रद्द, क़तर बन रहा बड़ी वजह

अमरीका में सऊदी अरब के राजदूत खालिद बिन सलमान ने फॉरेन पालिसी को दिए साक्षात्कार में कहाः कतर आतंकवाद का समर्थक है उसको अपनी विदेश नीति और कट्टरपंथी गुटों के साथ संबंधों के बारे में दोबारा सोचना चाहिए।
कतर शासन इस्राईल के साथ संबंध भी रखना चाहते हैं और और इसी के साथ ही वह फ़िलिस्तीनी गुटों, मुस्लिम ब्रदरहुड और आतंकवादियों के साथ भी संबंध रखे हुए हैं।

इस समय इस्राईली खुफिया विभाग मोसाद के 20 कर्मचारी आधिकारिक अनुमति के साथ कतर मे मौजूद हैं और व्यापारिक एवं औद्योगिक नकाब लगा कर विभिन्न देशों की नागरिकता के साथ कतर में रह रहे हमास के लीडरों, फ़िलिस्तीनी गुटों, और धार्मिक आंदोलनों पर नज़र रखे हुए हैं, कतर मोसाद के अधिकारियों की सहायता से दोहा में हमास के लीडरों के प्रबंधन करता है, तमीम परिवार में दोगलेपन और झूठ के अतिरिक्त और कुछ नहीं पाया जाता है।

उन्होंने तुर्की और सऊदी अरब के बीच होने वाले सभी हथियार खरीद समझौतों को रद्द किए जाने की तरफ़ इशारा करते हुए कहाः मिस्र और जार्डन में मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थन के लिए गठित कतर और तुर्की गठबंधन और तुर्की अधिकारियों द्वारा अरब विरोधी नीति के कारण सऊदी अरब ने इस देश से युद्धक नावों की खरीद समझौते को एकतरफा तौर से रद्द कर देगा।

उन्होंने कहा कि कतर और तुर्की ने मुस्लिम ब्रदरहुड का समर्थन करके अरब देशों में अशांति की स्थिति पैदा कर दी है, और ज़रूरत है कि यह दोनों देश अपनी गलत नीतियों को छोड़कर आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई और शांति के लिए दूसरे खाड़ी के देशों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें।

स्पोटनिक समाचार पत्र ने तुर्की और सऊदी अरब के बीच होने वाले हथियार खरीद समझौते को 200 करोड़ डालर का बताया है जिसके अनुसार सऊदी अरब को तुर्की से युद्धक नौकाएं खरीदनी थी।