Home अरब देश क्या सऊदी अरब यमन युद्ध की दलदल में फंस चुका है ?

क्या सऊदी अरब यमन युद्ध की दलदल में फंस चुका है ?

यमनी सेना और स्वयं सेवा बल अंसारुल्लाह ने 27 जनवरी को अल-जोफ़ प्रांत में सऊदी समर्थित लड़ाकों के ठिकानों पर 2 बैलिस्टिक मिसाइल फ़ायर किए.

यमनी सेना और स्वयं सेवा बल अंसारुल्लाह ने 27 जनवरी को अल-जोफ़ प्रांत में सऊदी समर्थित लड़ाकों के ठिकानों पर 2 बैलिस्टिक मिसाइल फ़ायर किए। इस प्रकार 2018 की शुरूआत से अब तक यमनी सेना और अंसारुल्लाह सऊदी सैन्य ठिकानों पर 10 बैलिस्टिक मिसाइल फ़ायर कर चुके हैं।

इससे आसानी से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यमन पर युद्ध थोपने का सऊदी युवराज एवं रक्षा मंत्री मोहम्मद बिन सलमान का सपना न केवल पूरा नहीं हुआ, बल्कि आले सऊद शासन एक दलदल में फंस चुका है।

सऊदी हमलों के सामने डटकर मध्यपूर्व के सबसे ग़रीब देश ने सऊदी अरब की समस्त साज़िशों और योजनाओं पर पानी फेर दिया है। युद्ध के दौरान यमन ने अपनी मिसाइल क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि करके न केवल अरब देशों बल्कि उनके घटक अमरीका और इस्राईल को भी हैरान कर दिया है।

ऐसी परिस्थितियों में आले सऊद शासन और अमरीका ने ईरान के ख़िलाफ़ निराधार आरोप मढ़ना शुरू कर दिए हैं।

ईरान पर आरोप मढ़ने का अर्थ औपचारिक रूप से यमन के दुश्मनों की पराजय को स्वीकार करना है, इसलिए कि संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी प्रतिनिधि द्वारा ईरान के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों के 48 घंटों के भीतर ही संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव के प्रवक्ता फ़रहान हक़ ने एलान किया कि इस बात का कोई सुबूत नहीं है कि जिससे यह साबित हो कि यमन द्वारा सऊदी अरब पर फ़ायर किए गए मिसाइल ईरान ने उपलब्ध कराए हैं।

यमन में सऊदी अरब की हार सामने देखकर रियाज़ के समर्थक राजनीतिक वार्ता पर बल देने लगे हैं। इस संदर्भ में यमन के राजनीतिक टीकाकार हमीद रिज़्क़ का कहना है कि सऊदी अरब के भीतर रणनीतिक लक्ष्यों पर मिसाइल हमलों से यह देश युद्ध जारी रखने पर सोचने पर मजबूर हो जाएगा।