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सऊदी अरब- भारतीय महिला की मौत के बाद परदेस में पूरी तरह तबाह हो गयी बच्चों की ज़िन्दगी

SOURCE-SAUDI GAZZET

बच्चों के माता-पिता की मृत्यु, विशेषकर जब बच्चे से माँ अलग होती है तो यह भावना ही कुछ अलग होती है, सबसे दुखद पल इस दुनिया का यही होता है जब कोई भी बच्चे अपने माता-पिता से अलग होते हैं और अगर माता-पिता की मृत्यु किसी दूसरे देश में हो तो यह सबसे ज्यादा दुखद होता है, क्योंकि परदेस में हमारा कोई अपना नहीं होता है.

सऊदी अरब में रह रहे प्रवासी श्रमिकों के लिए एक समय पर रोजी-रोटी के लिए काम करना और उसी समय अपने छोटे बच्चों की हिफाज़त करना सबसे ज्यादा विनाशकारी है.

42 वर्षीय मोहम्मद समीर, जो की भारत देश के उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, ने कहा की “जब मै रात को जॉब से आता हूँ तो मेरे बच्चे सो जाते हैं, उन्हें कभी मेरे साथ रहने का मौका ही नहीं मिलता है.”

समीर की जिन्दगी कुछ महीनो पहले तक बहुत ही आसान और अच्छी चल रही थी,समीर एक फर्नीचर की दुकान में काम करता था, समीर की पत्नी आतिका खातून, समीर के साथ दम्मम गयी, दोनों दम्पति के दो बच्चे हैं, आबिद हुसैन, 9 वर्षीय और 8 वर्षीय नूर ओस्मानी, दोनों बच्चों का जन्म सऊदी अरब में ही हुआ है.

समीर के मुताबिक, एक रात खातून समीर के लिए खाना बना रही थी, तभी अचानक खातून के सर का स्कार्फ स्टोव में जल गया, आग की लपटे खातून पर भी चले गयी, जिस वजह से खातून गंभीर रूप से घायल हो गयी.

समीर ने कहा की “उसका जलता हुआ शरीर देख कर मै खुद दर्द महसूस करने लगा, मैंने जल्द ही एमरजेंसी फ़ोन फायर डिपार्टमेंट को बुलाकर मै खातून को हॉस्पिटल ले गया.

लगभग चार महीनो तक अपनी जिन्दगी के लिए लडते-लड़ते खातूम की 13 दिसंबर 2017 को मौत हो गयी, खातून को इंडियन कम्युनिटी वालंटियर शोकौत नस वोक्कम  की सहायता से दम्माम में दफनाया गया.

समीर ने कहा की “सऊदी अरब में बदलती हुई परिस्थितियों के कारण, मैं अपने बच्चों को भारत भेजने की योजना बना रहा था लेकिन मेरी बेटी ने मुझसे बेहद करीब होने की वजह से भारत जाने से मना कर दिया और इसलिए अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद भी मैंने उन्हें यहां रखने का फैसला किया.

समीर ने उस घटना को याद करते हुए कहा की “नूर हर रात अपनी माँ की याद में रोती रहती है और मेरा बेटा भी अपनी मां को बहुत याद करता है.” वीकेंड पर वह दोनों अन्य बच्चों की तरह हफ्फ मून समुद्र तट या अन्य जगहों पर आनंद लेने नहीं जाते हैं, वह दोनों भाई बहन अपनी मां की कब्र पर जाते हैं.”

समीर ने कहा की “नूर अभी तीसरे ग्रेड में और आबिद चौथी कक्षा में इंटरनेशनल इंडियन स्कूल, दम्मम में पढ़ते हैं. केरल का एक परिवार मेरे बच्चों की सुरक्षा करता है, जब मै घर से बाहर रहता हूँ.”

केरल का वह परिवार एक अलग सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से हैं, मुनीर और उनकी पत्नी मेरे बच्चों को प्यार और स्नेह करते हैं, उनके सुखदायक देखभाल को शब्दों में नहीं वर्णित किया जा सकता है.”

हालाँकि अभी खातून की माँ, ने वीजा प्राप्त कर हवाई यात्रा से दम्माम में मेरे बच्चों की देखभाल के लिए आई हैं, मेरे बच्चों को भी उनकी नानी के साथ समय बिताना अच्छा लगता है.”