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इन भारतीय बहनों का सऊदी अरब सैंड आर्ट में दिखा जादू , देखे तस्वीरें

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भारतीय बहनों निलो और कौरी ने अल-दाहना में किंग अब्दुलअज़ीज़ कैमल फेस्टिवल में रेत की मूर्तियाँ बनाकर अपनी प्रतिभा से सभी दर्शकों को हैरत कर दिया.

अल-अरेबिया की खबरों के मुताबिक, निलों ने कहा की “फेस्टिवल मेनेजर से इनविटेशन पाने पर उन्होंने इस फेस्टिवल में भाग लिया और भारत से यहाँ आये है, निलों ने कहा की “उन्होंने कई कलाकृतियों और मूर्तिकलाओं को बनाकर अपना योगदान दिया है, जिसमें राज्य के विजन 2030 का नक्शा भी शामिल है.

निलों ने कहा की “हम एक बड़े ढेर में रेत डालते हैं और फिर पानी डालकर मिश्रण तैयार कर मूर्तियाँ बनाते हैं.”

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ऊंट और चरवाह

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निलो ने अपनी कलाकृति में एक ऊंट की काठी की जटिल विवरण का प्रदर्शन किया, साथ ही चरवाहा की मूर्ती भी बनायीं और मूर्ति चरवाहा पर पारंपरिक सऊदी पोशाक भी दिखाया.

निलो ने कहा कि वे सऊदी अरब के युवाओं को एक संदेश भेजना चाहती हैं की “जीवन कठिनाइयों और चुनौतियों से भरा हुआ है, तो आपको कभी भी अपने जुनून को नहीं छोड़ देना चाहिए और आप सफल होंगे.”

राजा अब्दुल अजीज और ऊंट झुंड

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नीलो ने कहा कि “वह ऊंट की मूर्तिकला चाहती थी, और चाहती थी की राजा अब्दुल अजीज और उनके लोग एकजुट हो जाएं, जो सऊदी अरब के झंडे वाले ऊंटों पर सवारी करते थे, ” हालाँकि निलो पहली बार सऊदी अरब का दौरा कर रही थी, निलों ने कहा की उन्हें सऊदी संस्कृति ने अपनी तरफ मंत्रमुग्ध कर दिया.

3 डी ऊंट की मूर्ती 

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निलो ने कहा कि “प्रत्येक ऊंट मूर्तिकला को पूरा करने में पांच दिन लगे, जबकि विजन 2030 का नक्शा बनाने में बस तीन दिनों का समय लगा.”

निलो ने कहा कि “सऊदी अरब एक आधुनिकीकरण की तरफ बढ़ रहा है, वे अभी भी अपनी पारंपरिक पोशाक, चाय, कॉफी, लोककथाओं और अन्य परंपराओं सहित अपनी संस्कृति को साथ में लेकर चलते हैं, जिसे दुनिया मे कहीं और नहीं देखा जा सकता”.

 निलो ने कहा की “कौरी एक मैकेनिकल इंजीनियर है, दोनों को मूर्तियाँ बनाने का जूनून था और अब यह जूनून पेशे में बदल गया.”

सऊदी अरब में उनकी यह सैंड आर्ट की झलक उनकी निजी जिन्दगी की 60 वीं सैंड आर्ट हैं और अब वह एक म्यूजियम खोलकर सऊदी अरब की विरासत को म्यूजियम में रखना चाहते हैं”.