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“जो राष्ट्र मस्जिद बनाता है, वहाँ के लोग थिएटर में नहीं जा सकते” : सऊदी नागरिक

रियाद- सोमवार को 35 साल बाद सऊदी में सिनेमा के दोबारा से खुलने की खबर से जहाँ कई लोगों ने ट्विटर पर अपनी खुशी जाहिर की तो वहीं कुछ नकारात्मक प्रतिक्रिया देने वाले लोग भी थे, जिन्होंने हैश टैग के माध्यम से सोशल मीडिया पर अपनी नकारात्मक प्रतिक्रिया वायरल कर दी, उनके हैश टैग ने पुरे सोशल मीडिया पर बहस फैला दी है. कई सऊदी का कहना है की “इस्लाम में यह अस्वीकार्य है”.

हालाँकि सिनेमाघर खुलने की खबर आने के बाद से सोशल मीडिया पर उन लोगो की बात अधिक की जा रही है जो इस फैसले से प्रसन्नता ज़ाहिर कर रहे है. जैसा की अफगानिस्तान में जंग के समय हुआ था और पश्चिमी मीडिया ने दाढ़ी कटवा रहे दो चार लोगो को बढ़चढ़ कर दिखाना शुरू कर दिया था और यह कहा जा रहा था की तालिबान से मुक्ति पाने की ख़ुशी में लोग क्लीन शेव करवा रहे है जिसके बाद अफगानियों ने विरोध करके यह कहा था की दाढ़ी रखना तालिबान की निशानी नही बल्कि नबी की सुन्नत है और यह हर मुसलमान पर सुन्नत है. वैसा ही आजकल सऊदी अरब में हो रहा है.

सरकार ने सिनेमाघर फिर से खोलने का आदेश तो दे दिया है लेकिन इस आदेश से वहां के नागरिक खुश नही हैं, उनका कहना है की मुसलमान सऊदी अरब को देखकर प्रेरणा हासिल करते हैं अगर सऊदी अरब में इस तरह के संगीत कार्यक्रम और सिनेमा खुलेआम होगा तो आम मुसलमानों में गुमराही फैलेगी.

आइये पढ़ते हैं सोशल मीडिया पर लोग किस तरह इस फैसले का विरोध जता रहे हैं.

(“सिनेमा इस्लाम में अस्वीकार्य है और इसे बढ़ावा नहीं देता है. क्या सिनेमा ने मिस्र को विकसित करने में सहायता की है? नहीं, क्या यह ट्यूनीशिया को आगे बढ़ाने में मदद करता है? नहीं लेबनान? नहीं सीरिया? नहीं, इराक? तो आप इस पर इतना खुश क्यों हैं? की यह विकास में बढ़ावा देगा.)

(“एक राष्ट्र जो मस्जिद बनाता है, वह लोग फिल्म थिएटर में नहीं जा सकते, यह विपरीत हैं जो कभी नहीं मिल सकते”)

“कुछ लोग विरोध करते हैं लेकिन समय के साथ वे इसे इस्तेमाल करते हैं. इसके बहुत सारे उदाहरण हैं, मोबाइल फोन, कैमरे, और इंटरनेट सभी ने बहुत से विरोध किया है और दूसरों के द्वारा अस्वीकार्य के रूप में देखा गया है, लेकिन हर कोई उन्हें आज का उपयोग कर रहा है”

सऊदी अरब में सिनेमाघरों पर लगे प्रतिबंध को हटाने का फैसला लोगों के लिए आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि यह कई महीनो से अनुमान लगाया जा रहा था.
सऊदी अरब के विजन 2030 के तहत 2017 में सऊदी अरब में बहुत बड़े बड़े बदलाव किये गए.