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अहमद असीरी के यमनी जनता की जान बचाने को हमले वाले बयान पर यमन की जनता ने किया विरोध

यमन के लोगों ने हालिया दिनों में राजधानी सना सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन करके सऊदी किंग सलमान के प्रति अपराधों की भर्त्सना और उसके प्रति घृणा व्यक्त की है.

यमन में सऊदी अरब के जारी अपराधों ने विस्तृत रूप धारण कर लिया है और यमन के लोग भी प्रदर्शन करके इस देश में सऊदी अरब के अपराधों की भर्त्सना करते हैं और यमन के लोगों ने हालिया दिनों में राजधानी सना सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन करके आले सऊद के अपराधों की भर्त्सना और उसके प्रति घृणा व्यक्त की है.

यह ऐसी स्थिति में है जब सऊदी अधिकारी इस संबंध में बौखलाहट के शिकार हैं. इस प्रकार से कि सऊदी अरब के उप रक्षामंत्री और सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता अहमद असीरी ने दावा किया है कि यमन में हस्तक्षेप इस देश के लोगों की जान बचाने के लिए किया गया है और यह गठबंधन यमन पर कब्ज़ा करने के प्रयाय में नहीं है.

इसी प्रकार उन्होंने दावा किया कि यमन की कानूनी सरकार अर्थात यमन के अपदस्थ और भगोड़े राष्ट्रपति का यमन की 85 प्रतिशत भूमि पर शासन है और यमन में सामान्य स्थिति बहाल हो गयी है.

सऊदी अधिकारी यमन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का औचित्य दर्शाने का दावा ऐसी स्थिति में कर रहे हैं जब यमन में सऊदी हमलों के परिणाम में हज़ारों यमनी हताहत व घायल हो चुके हैं और इस देश की अधिकांश आधारभूत संरचनाएं तबाह हो गयी हैं. सऊदी अरब ने 26 मार्च वर्ष 2015 को यमन पर हमला किया था जिसमें अब तक 12 हज़ार से अधिक यमनी हताहत और लाखों बेघर हो चुके हैं.

सऊदी अरब ने दो वर्ष पहले यमन पर हमला आरंभ किया था और उसे अपेक्षा थी कि जल्द ही यमन का अंसारुल्लाह आंदोलन पराजित हो जायेगा और यमन के अपदस्थ राष्ट्रपति मंसूर हादी दोबारा सत्ता में लौट आयेंगे परंतु यह युद्ध शीघ्र समाप्त नहीं हुआ और वह अब भी यथावत जारी है और व्यवहारिक रूप से उसने थका देने वाले युद्ध का रूप धारण कर लिया है.

इसका मुख्य कारण यह है कि सऊदी अरब की तानाशाही सरकार ने यमनी जनता की प्रतिरोधक शक्ति की अनदेखी कर दी थी.

बहरहाल सऊदी अरब द्वारा इस युद्ध को आरंभ किये हुए दो वर्ष से अधिक का समय गुजर रहा है और सऊदी अरब अपने किसी भी लक्ष्य को न साध तक सका और सऊदी अधिकारी यमन युद्ध के बारे में बौखलाहट का शिकार हो गये हैं यहां तक कि वे अब इस युद्ध के बारे में इस प्रकार का बयान दे रहे हैं जिससे वे पहले से अधिक आम जनमत के मज़ाक का कारण बन रहे हैं.