Home अरब देश हिजाब पहनना मुस्लिम महिला की मर्ज़ी होती है, मजबूरी नहीं

हिजाब पहनना मुस्लिम महिला की मर्ज़ी होती है, मजबूरी नहीं

अक्सर गैर-मुस्लिमों को ये ग़लतफहमी होती है कि मुस्लिम महिलाएं हिजाब पहनने के लिए मजबूर की जाती हैं, वे अपनी मर्ज़ी के खिलाफ हिजाब पहनती हैं. लेकिन इसी सोच को गलत साबित कर दिया एक पिता-पुत्री के बीच चैटिंग के सोशल मीडिया पर वायरल हुए स्क्रीनशॉट्स ने. ये स्क्रीनशॉट्स खुद लड़की ने ही सोशल मीडिया पर अपडेट किये जिससे दुनिया ये जान सके कि हिजाब पहनना एक मुस्लिम महिला की इच्छा होती है, उसकी मजबूरी नहीं.

हुआ यूँ कि पेंसिल्वेनिया में रहने वाली एक 17 वर्षीय मुस्लिम लड़की लामया ने अपने पिता को एक सन्देश भेजा जिसमें उसने अपने पिता से पूछा कि क्या वह अपना हिजाब उतार सकती है. अपने पिता के साथ एक किशोरी लड़की के बीच वार्तालाप सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और लोग इसका बहुत स्वागत भी कर रहे हैं.

इस लड़की के पिता ने उत्तर में जो कहा उसे जानकार लोगों के मन में उसके प्रति सम्मान जाग उठा. लड़की के पिता ने जवाब दिया कि मेरी प्यारी बेटी, ये मेरे निर्णय लेने का विषय नहीं है. असल में ये दुनिया के किसी भी आदमी के निर्णय करने का विषय नहीं है. ये तुम्हारे निर्णय लेने का विषय है. इस पिता ने आगे कहा कि जो तुम्हे उचित लगे, जो तुम्हे अच्छा लगे तुम वो करो, मैं हर हाल में तुम्हारे साथ हूँ. इस लड़की ने अपने पिता के संदेशों का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर अपलोड किया तो लाखों लोगों ने इसकी सराहना की.

एक खबर के अनुसार, लामया उस ग्रुप की सदस्य थी जिसने हाल ही में ‘राष्ट्रपति ट्रम्प और तनावपूर्ण राजनीतिक माहौल’ विषय पर चर्चा की थी. ट्रम्प ने भी मुसलमाओं के खिलाफ अपने विचारों पर हो रही इस आलोचना में हिस्सा लिया. लामया का कहना है कि ट्रम्प के विचारों ने उन्हें प्रभावित किया है क्योंकि वो एक मुस्लिम महिला हैं और साथ ही अरब भी.

उनके बयान के जवाब में समूह के एक व्यक्ति ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें नीचे बैठने को कहा. लामया को एक मुस्लिम होने के कारण उसकी प्रतिक्रिया अतिवादी लगी. उसने अपने पिता को एक सन्देश भेजा जिसमें उसने अपने हिजाब को उतारने के बारे में लिखा. उत्तर में आई उसके पिता की प्रतिक्रिया को लामया ने सोशल मीडिया पर शेयर किया. लामया के पिता की प्रगतिशील टिप्पणी ने लाखों लोगों का दिल जीत लिया है.

हालाँकि बहुत से लोगों को उनकी पोस्ट पढ़कर ग़लतफहमी भी हो गयी कि वह पिता-पुत्री हिजाब के बारे में नकारात्मक बातें कर रहे हैं और इस सोच को बढ़ावा दे रहे हैं. ये जानकार लामया को सोशल मीडिया पर एक और पोस्ट अपडेट करनी पड़ी जिसमें उन्होंने लिखा कि वो सिर्फ इतना बताना चाहती हैं कि किसी महिला को ज़बरदस्ती हिजाब नहीं पहनना पड़ता. हिजाब पहनना किसी महिला की व्यक्तिगत पसंद होती है. वो इसे अपने लिए और अपने ईश्वर के लिए पहनती हैं.