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सऊदी अरब मंदी की चपेट में

सऊदी अरब में मंदी का कार्यकाल समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा हैं. तेल की कीमतों में वृद्धि के बाद तेल राजस्व में कटौती हुई हैं जिसके कारण देश निरंतर मंदी का सामना कर रहा हैं. बजट की घोषणा के बाद सऊदी अरब में बीते महीने कांसुमेर प्राइस इंडेक्स में भारी गिरावट देखी गई है.

मंगलवार को सऊदी सरकार की तरफ से एक आंकड़ा जारी किया गया जिसमें बताया गया है कि बीते एक दशक में पहली बार सऊदी अरब इतनी भारी मंदी का सामना कर रहा हैं. यह गिरावट सरकार की तरफ से रेवेन्यू बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों के चलते हुआ है.

सेंट्रल डिपार्टमेंट ऑफ स्टैटिस्टिक्स के मुताबिक, सऊदी इकॉनमी में कमजोरी के चलते यह स्थिति पैदा हुई है. उल्लेखनीय हैं कि इकॉनमी में कमज़ोरी का कारण तेल राजस्व में आये घाटे के कारण हैं. सऊदी रियाल के मुकाबले अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने के चलते भी यह स्थिति पैदा हुई है.

लेकिन फोर्बेस की रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब तेल उत्पादकता को कम रहा हैं और सऊदी अरब की आर्थिक स्थिति को दुसरे क्षेत्रों में बाँटने की कोशिश कर रहा हैं. यदि ऐसा होता हैं तो सऊदी अरब इन सभी परेशानियों से बहुत दूर हो जायेगा.