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भारतीय हज तीर्थयात्रियों के लिए अच्छी खबर, फिर खुलेगा मुंबई से जेद्दाह तक का समुद्री मार्ग

सऊदी अरब ने भारत के साथ हज यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों के लिए जेद्दाह बंदरगाह को दोबारा खोलने के लिए समझौता कर लिया है.

22 साल बाद भारत दुनिया में मुस्लिम आबादी वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है, जिसने सऊदी अरब को ऐतिहासिक समुद्री मार्ग को पुनर्जीवित करने का सुझाव दिया है.

कई बुजुर्ग मुस्लिम उन दिनों को याद करते हैं जब 1995 तक वह मुंबई से जेद्दाह समुद्री मार्ग से हज यात्रा के लिए जाया करते थे, जहां उन्हें हज यात्रा करने के लिए 10-12 दिन लगते थे, राज्य सरकार के शिपमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के बुजुर्ग फ्लाईट को चरणबद्ध किया गया और तब हज तीर्थयात्रियों के पास हवाई यात्रा करने के सिवाय कोई और चारा नहीं बचा. लेकिन 2018 में सभी आधुनिक सुविधाओं के साथ क्रूज जहाज तैयार किये जायेंगे, नए जहाजों में लगभग 5000 तीर्थयात्रियों को समायोजित किया जाएगा और सिर्फ 2-3 दिनों में मुंबई और जेद्दाह के बीच की दूरी को कवर किया जाएगा.

An Indian Muslim woman pilgrim cries as she hugs her son at the airport before leaving for the annual hajj pilgrimage to the holy city of Mecca in .  Photo /Manish Swarup)

भारत के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने घोषणा की है “कि समुद्र मार्ग का फिर से खुलना 50 प्रतिशत से अधिक खर्च वाले हज खर्च को कम करेगा. वर्तमान में, सरकार देश में 23 स्थलों से एयर इंडिया की हज उड़ानों को सब्सिडी देती है, तीर्थयात्री भारत हज समिति (एचसीओआई) या निजी टूर ऑपरेटर (पीटीओ) के माध्यम से यात्रा करते हैं.

Indian Muslim Hajj pilgrims from Gujarat state gesture prior to departure to Mecca for the annual Hajj pilgrimage, at the Sardar Vallabhbhai Patel International Airport in Ahmedabad HOTO / SAM PANTHAKY

हवा और समुद्र द्वारा यात्रा करने वाले 73 वर्षीय घरेलू निर्माता सकिना शेख ने बताया, “हवा से यात्रा तेज और अधिक आरामदायक है, लेकिन समुद्र की यात्रा ने आध्यात्मिक अनुभव बढ़ाया, आपके पास अपने जीवन और कर्मों पर विचार करने के लिए पर्याप्त समय होता है.

 

हज यात्रियों को समुद्र मार्ग से सऊदी अरब भेजने की प्रक्रिया 1995 में समाप्त कर दी गई थी, क्योंकि जिस जहाज एमवी अकबरी से उन्हें गल्फ देश ले जाया जाता था वह पुराना हो गया था, “समुद्र से आने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या धीरे-धीरे कम हो गयी और 1994 तक यह घटकर 4,700 पर आ गयी. आखिर में 1995 में, समुद्री यात्रा पूरी तरह से बंद कर दी गई और सभी भारतीय तीर्थयात्रियों मेक्का का सफ़र हवाईजहाज़ से शुरू कर दिया.

Kashmiri Muslim pilgrims wave as they leave for the hajj pilgrimage to the holy city of Mecca,Photo/Dar Yasin)

2006 तक, भारतीय तीर्थयात्रियों की संख्या 157,000 तक पहुंच गई, इस साल   सऊदी अरब ने 170,000 तीर्थयात्रियों को भेजने के लिए भारत को इजाज़त दी थी.