Home अरब देश तुर्की से दोस्ती, अमीरात से दूरी

तुर्की से दोस्ती, अमीरात से दूरी

सऊदी अरब की तुर्की के साथ तेज़ी से बढ़ती नज़दीकी पर संयुक्त अरब अमीरात चिंतित है। तुर्की के प्रधानमंत्री बिन अली यलदरीम की हालिया सऊदी अरब यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ती नज़दीकी दिखा रहा है।

तुर्की के प्रधानमंत्री ने बुधवार को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और रक्षा मंत्री मोहम्म्द बिन सलमान से मुलाकात की और कहाः की शीघ्र की बिन सलमान तुर्की आएंगे।

बिन अली ने कहा है कि अगरचे उनकी रियाज़ यात्रा अल्पावधि की थी लेकिन कामयाब रही।

उन्होंने कहाः तुर्की और सऊदी अरब दोनों देश कभी समय से क्षेत्र में शांति और स्थायित्व को बनाए रखने में मुख्य भूमिका निभाने वाले देश हैं।

दोनों देशों के उच्चाधिकारियों के बीच यह मुलाकात दोनों देशों में मीडिया स्तर पर जारी तनाव के बीच हुई है। पिछले कुछ समय में तुर्की और सऊदी अरब के बीच मतभेद बढ़े हैं, अगरचे दोनों देशों के अधिकारियों ने कुछ नहीं कहा है लेकिन दोनों देशों की मीडिया एक दूसरे के विरुद्ध आग उगल रही है।

तुर्की और सऊदी अरब के बीच तनाम तब से शुरू हुआ जब अपने को इस्लामी देशों का लीडर कहने वाला सऊदी अरब बैतुल मुकद्दस के संबंध में तुर्की मे होनें वाले सम्मेलन में बहुत ही छोटे स्तर पर शामिल हुआ।

दोनों देशों के बीच मतभेद का दूसरा कारण तुर्क राष्ट्रपति की सूडान यात्रा और सूडान के सोवाकीन द्वीर को तुर्की को दिए जाने औरतुर्की द्वारा वहां एक सैन्य बंदरगाह के निर्माण की संभावना है, जिसने सऊदी अरब की चिंताओं और क्रोध को बढ़ा दिया है।

हालांकि तुर्क प्रधानमंत्री की सऊदी यात्रा दोनों देशों के बीच मतभेद कम करने की स्पष्ट संदेश हो सकता है।

तुर्की और सऊदी अरब के बीच तनाव का इतिहास मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड के विरुद्ध सैन्य तख्तापलट के समय का है, और अमरीका में ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने और अमरीका के सऊदी अरब के साथ बढ़ते संबंधों के बीच तुर्की और सऊदी अरब के बीच संबंध और संकटमयी हो गए

लेकिन अब दोनों देशों के अधिकारियों के एक दूसरे देशों की यात्रा के बाद ऐसा लगता है कि दोनों देशों के संबंधों पर जमी बर्फ पिघल रही है। इसी प्रकार यह संबंध सऊदी अरब के दूसरे सहयोगियों जैसे संयुक्त अरब अमीरात और यमन युद्ध जिसे विश्लेषकों ने जनसंहार बताया है पर भी प्रभाव डालेगा।

इसी बीच राय अलयौम समाचार पत्र ने तुर्की और सऊदी के बीच बढ़ते संबंधों के बीच रियाज़ और अबूधाबी कमज़ोर होते संबंधों की बात कही है जिसके बाद यमन युद्ध से अमीराती बल बाहर निकल सकते हैं। सऊदी अरब और यमन के बीच मतभेद कई मुद्दों पर हैं जैसे यमन युद्ध, मुस्लिम ब्रदरहुड के साथ संबंध और तुर्की के साथ बढ़ते संबंध हैं।

सऊदी अरब के तुर्की के साथ तेज़ी से बढ़ती नज़दीकी पर संयुक्त अरब अमीरात चिंतित है। तुर्की के प्रधानमंत्री बिन अली यलदरीम की हालिया सऊदी अरब यात्रा दोनों देसों के बीच बढ़ती नज़दीकी दिखा रहा है।

इस यात्रा पर यलदरीम का भव्य स्वागत किया गया है और उन्होंने सऊदी बादशाह से दो बार मुलाकात की है। जिनमें से एक मुलाकात गोपनीय और क्षेत्रीय हालात पर थी। उन्होंने मोहम्मद बिन सलमान से भी मुलाकात की है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि तुर्की और सऊदी अरब के बीच संबंध ऐसी स्थिति में बढ़ रहे हैं कि जब तुर्की और अमीरात के बीच संबंध अपने सबसे बुरे दौर में चल रहे हैं। यह संबंध उस समय बिगड़े थे जब तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान ने अमीरात के विदेश मंत्री के ट्वीट पर उनकी कड़ी आलोचना की थी। अमीरात के विदेश मंत्री अब्दुल्लाह बिन ज़ाएद ने अपने ट्वीट में उस्मानी साम्राज्य के कमांडर और उस समय के मदीना के गवर्नर खैरुद्दीन पाशा पर इस्लामी मीरास की चोरी का आरोप लगाया था। एर्दोगान ने इस ट्वीट के उत्तर में कहाः हम पर आरोप लगाने वाले यह बता कि जब फखरुद्दीन मदीना शहर की सुरक्षा कर रहे थे तब तुम्हारे पूर्वज कहा थे?

उसके बाद एर्दोगान ने आक्रमक रुख अपना ते हुए कहाः अपनी सीमाओं को पहचानो, तुम ने अभी तुर्की की जनता और एर्दोगान को पहचाना नहीं है। तुम ने एर्दोगान के पूर्वजों को पहचाना नहीं है।

इसी प्रकार यूएई के विदेश मामलों के सलाहकार मंत्री अनवर करकाश ने अपने एक ट्वीट में जो सऊदी अरब और अमरीका के बीच बढ़ते संकट को दर्शाता है इस प्रकार तुर्की और सऊदी अरब के बीच बढ़ती नज़दीकियों पर अपनी नाराज़गी प्रकट कीः अरब देशों को अरब मोर्चे को शक्तिशाली बनाने के लिए रियाज़ और काहेरा स्तंभ की आवश्यकता है, कबीलावादी सोंच स्वीकार्य नहीं है।

दूसरी तरफ़ तुर्की और सऊदी अरब में बढ़ते संबंध सऊदी अरब और कतर के बीच जारे संकट को भी समाप्त कर सकते हैं। और अगर ऐसा होता है तो अमीरात अलग थलग पड़ जाएगा। हम देख ही रह हैं कि कतर की मीडिया ने सऊदी अरब के विरुद्ध अपने आक्रमक तेवरों में कमी की है, और अमीरात के विरुद्ध आक्रमक रुख को बढ़ाया है।