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सऊदी अरब- नकाब नही पहना था महिला वकील को कोर्ट रूम से बाहर निकाला गया

source- rt.com

world news Arabia published date 22 December 2017 time 10:43

एक वकील को सऊदी कोर्ट रूम से सिर्फ इस बात के लिए बाहर निकाल दिया गया क्योंकि उसने नकाब नहीं पहना था.

एक सऊदी वकील अब्दुल रहमान अल लाहेम ने अपनी एक छात्रा को अपने साथ इंटर्न के तौर पर काम पर रखा था, उसे सऊदी कोर्ट से निकाल दिया गया, इस खबर ने सोशल मीडिया पर काफी हलचल पैदा कर दी है.

अल लाहेम ने कहा की “रियाद पब्लिक कोर्ट में एक सत्र के दौरान हम सब बैठे थे, अपना काम कर रहे थे, तभी जज साहब आये और उन्होंने गुस्से से मेरी छात्रा को देखा जिसने नकाब नहीं पहना था, क्योंकि वह इस्लाम में बहुत विश्वास करते हैं और इस्लाम में यह सब हराम है, उन्होंने सिक्यूरिटी और पुलिस अधिकारीयों को बुलाया, पुलिस ने वहाँ पहुचकर लड़की को कोर्ट रूम से बाहर निकाल दिया.

जब अल लाहेम से एक टीवी रिपोर्टर ने पुछा की क्या यही वजह थी महिला को कोर्ट रूम से बाहर निकालने की तो उन्होंने कहा की हाँ सिर्फ यही वजह थी.

अल लाहेम ने कहा कि महिला ने अब न्यायाधीश के खिलाफ एक मुकदमा दायर किया है.

इस घटना के सोशल मीडिया पर वायरल हो जाने के बाद लोगों ने अपनी अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसमे कई लोगों ने जज के समर्थन में कहा की उन्होंने ऐसा इसलिए नहीं किया होगा की उसने हिकाब नहीं पहना है तो कई लोगों ने महिला के समर्थन में कहा की ऐसा नहीं किया जाना चाहिए.

इसके सोशल मीडिया पर वायरल होने पर लोगों ने जाहिर की अपनी प्रतिक्रिया

(मै कंफ्यूज हूँ की ये लोग इन छोटे मुद्दों को क्यों चुनते हैं, इन्हें भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर काम करना चाहिए)

(आप जज का इंटरव्यू क्यों नहीं ले रहो ? क्या पता यह आदमी महिला वकील के साथ प्लान कर आया हो)

(अगर कोई हिजाब पहन कर काम करता है या मामूली कपडे पहन कर. किसी को कोई हक नहीं है काम का अपमान करने का)

(“अपने व्यक्तिगत धार्मिक विश्वासों को अपने पास रखें … दूसरों पर उन्हें लागू न करें”)

स्टेप  फीड  की खबरों के मुताबिक नकाब पहनना अनिवार्य नहीं है, इसे फ़ोर्स कर के किसी पर लागु नहीं किया जा सकता, जब भी वस्त्रों की बात आती है तो लोग अपनी अपनी राय देते हैं, कई लोग कहते हैं की यह पहनना अनिवार्य है, कई कहते हैं की किसी को मजबूर कर पहनाया नहीं जा सकता.

डॉ रेहान इस्माइल, ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी में मिडिल ईस्ट पॉलिटिक्स एंड इस्लामिक स्टडीज के लेक्चरर ने इससे सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण बाते बतायी.
उन्होंने कहा की “कुरान स्पष्ट रूप से नहीं कहती कि आपको इस तरीके से खुद को कवर करना होगा,”
“कुछ विद्वानों का तर्क है कि यह एक धार्मिक दायित्व है, विशेष रूप से मुस्लिम दुनिया के भीतर अधिक रूढ़िवादी गुट हैं, इसमें कई भिन्नताएं और व्याख्याएं हैं”

जब पूछा गया कि क्यों महिलाओं को किसी भी प्रकार के घूंघट पहनना चुनना होता है, जिसमें निकाब (आंखों के लिए एक भट्ठा से भरा शरीर) या बुर्का (आंखों पर जाल के साथ पूरे शरीर को ढंकना) हो तो डॉ इस्माइल ने कहा की  “कुछ महिलाएं पहनती हैं क्योंकि वे दृढ़ता से मानते हैं कि यह उनका धार्मिक दायित्व है “

हालाँकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दूसरों को “अपने आप को कवर करने पर दबाव डाला जा सकता है”