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सऊदी अरब के साथ ट्रम्प ने फिर से बहाल किये सम्बन्ध, सऊदी को होगा फायदा

सार्वजनिक रूप से मुस्लिम देशों को बैन करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एकदम ही पासा उलट दिया. इस मंगलवार ट्रम्प ने सऊदी रॉयल्स के लिए अपने दरवाज़े पूरी तरह खोल दिए.

रियाध के उच्च स्तरीय शिष्टमंडल के साथ डोनाल्ड ट्रम्प और उनके शीर्ष वाइट हाउस सहयोगियों की बैठक आयोजित की गयी. जिस में सऊदी के डिप्टी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने आठ साल बाद अमेरिका और सऊदी संबंधों में ‘ऐतिहासिक बदलाव’ का स्वागत किया.

बुधवार को जारी व्हाइट हाउस के एक बयान में कहा गया है कि ट्रम्प और सलमान ने अपनी टीमों को राजनीतिक, सैन्य, सुरक्षा, आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक मकसदों पर संयुक्त राज्य अमेरिका-सऊदी सामरिक संबंधों को और अधिक मजबूत करने और बढ़ाने के तरीके खोजने के लिए निर्देशित किया था. बयान में कहा गया है कि दोनों पक्ष आर्थिक, वाणिज्यिक, निवेश और ऊर्जा क्षेत्रों में अधिक सहयोग करने और अगले चार सालों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष निवेश में संभावित रूप से 200 अरब डॉलर से अधिक का मूल्य “यू.एस. सऊदी” कार्यक्रम शुरू करने पर सहमत हुए. और कोई विवरण प्रदान नहीं किया गया.

सऊदी के अमेरिका से सम्बन्ध बेहद ख़राब रहे हैं. सऊदी नेतृत्व ने हिलेरी क्लिंटन को अपने साथ क्षेत्रीय मुद्दों पर अधिक गठबंधन देखा, लेकिन फिर भी वे चिंतित हैं कि वह सऊदी राजनीतिक सुधार और मानव अधिकारों के सम्मान पर जोर देगी. लेकिन ट्रम्प प्रशासन के साथ अब ये मुद्दा मायने नहीं रखता है.

अमेरिकी उद्यम संस्थान के एक वरिष्ठ साथी एंड्रयू बोवेन ने इस हफ्ते एक पत्र में लिखा, “सउदियों ने ट्रम्प प्रशासन और इसके ‘अमेरिका फर्स्ट’ विदेश नीति के प्रति दृष्टिकोण के बारे में आशावाद व्यक्त किया है. ट्रम्प की कैबिनेट में चुने गए अधिकारी भी लम्बे समय से सऊदी सरकार और खाड़ी देशों से दोस्ताना सम्बन्ध निभाते रहे हैं. रक्षा सचिव जिम मैटिस ने सैन्य मुद्दों पर दशकों से खाड़ी सरकारों के साथ काम किया है. राज्य मंत्री रेक्स टिलर्ससन एक एग्जीक्यूटिव के रूप में एक्सॉन मोबिल में काम करते रहे हैं. दोनों मॅटिस और टिलरसन कथित तौर पर सहमति व्यक्त करते हैं कि अमेरिकी सैन्य सहायता की स्थिति के रूप में राजनीतिक सुधार और मानवाधिकारों की चिंताएं खारिज की जानी चाहिए.