यमन, अरब जगत का सबसे गरीब देश, सालो से चल रहे गृहयुद्ध ने इस देश को इतना प्रभावित किया हैं कि देश की स्थिति दयनीय हो गयी हैं. रिपोर्ट के अनुसार हज़ारो बेगुनाह नागरिको की मौत हो चुकी हैं संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार साल 2015 से जारी इस गृहयुद्ध में 10,000 जाने गयी हैं.

साथ ही संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट का कहना हैं कि वास्तव में मरने वालो की संख्या इससे बहुत अधिक हैं. हज़ारो-लाखो नागरिक घायल हो चुके हैं, और प्रतिदिन भी ये सिलसिला जारी रहता हैं. सबसे एहम बात लाखो की तादात में यमन के बच्चे भुखमरी और कुपोषण का शिकार हो गए हैं.

आपको बता दे कि सऊदी अरब के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना जिसमे अमेरिकी सेना भी शामिल हैं, यमन की सरकारी सेना के साथ मिलकर यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ रही हैं, लेकिंन वही ईरानी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार यमन की सेना स्वयमसेवी बलो के साथ मिलकर सऊदी सेना से लड़ रही हैं.

इन दोनों रिपोर्ट की सच्चाई अभी तक साफ़ नहीं हुई हैं, कई मीडिया रिपोर्ट का कहना हैं कि सऊदी अरब की सेना यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ रही हैं और हटाये गए राष्ट्रपति को वापस लाने की कोशिश कर रही हैं, वही कुछ का कहना हैं कि सरकारी सेना खुद सऊदी अरब के खिलाफ लड़ रही हैं.

खैर, मामला कुछ भी हो इसमें यमन के बेगुनाह नागरिक कुचले जा रहे हैं, इस युद्ध के कारण यहां अकाल और भूखमरी की स्थिति पैदा हो गई है. संयुक्त राष्ट्र अन्तर्राष्ट्रीय बाल आपात निधि (UNICEF) की रिपोर्ट के अनुसार यमन में भुखमरी के कारण हर हफ्ते कम से कम 1,000 बच्चे दम तोड़ रहे हैं.

रिपोर्ट के अनुसार भुखमरी के कारण बच्चे डायरिया और निमोनिया जैसी साधारण बीमारियों से मर रहे हैं. इस समय करीब 22 लाख बच्चे यमन भर में कुपोषण से पीड़ित हैं.

ऐसे ही भुखमरी से पीड़ित 19 साल के मुहम्मद अली ने अपनी आपबीती बताई, अली ने बताया कि भूख और हवाई बमबारी से लड़ रहे हजारों यमन नागरिकों में से मैं भी हूँ. अली के 2 साल के चचेरे भाई की भूख से मौत हो गई. अली का एक छोटा भाई मुहन्नद है और अली को डर है कि भूख के कारण मरने वालों में अगला नाम उसके भाई का हो सकता है.

मोहन्नद की उम्र 5 साल है. अन्य बच्चो की तरह वो भी कुपोषण का शिकार हो चुका हैं. कमजोरी और भूख के कारण हालात इतने ख़राब हो गए हैं कि वह ठीक से सांस भी नहीं ले पाता है। उसकी पसलियों के ऊपर मांस नहीं, चमड़े की एक पतली परत है। अली कहता है, ‘कुपोषण के कारण मैं अपने चचेरे भाई को तो खो चुका हूं, लेकिन अब मैं अपने छोटे भाई को नहीं खो सकता.

यमन में भुखमरी झेल रहे 22 लाख में से करीब 4, 62, 000 बच्चे ऐसे हैं जो कि मुहन्नद की ही तरह गंभीर और जानलेवा कुपोषण से जूझ रहे हैं.यमन में UNICEF के प्रवक्ता रजत मधोक ने कहा, ‘जिंदगियों को बचाने की हमारी कोशिशें हैं. लेकिन फंड की कमी और युद्धग्रस्त इलाकों के अंदर जा पाने की दिक्कत के कारण ये कोशिश प्रभावित हो रही हैं.


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