भारत के पक्षिम बंगाल प्रान्त की राजधानी कोलकाता में केंद्र सरकार द्वारा की गयी नोटबंदी के खिलाफ विरोध में 7 जनवरी प्रदर्शन आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम के आयोजक तृणमूल कांग्रेस के सांसद इदरीस अली थे.

इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने पहुंचे शहर की टीपू सुल्तान मस्जिद के इमाम मोहम्मद नूर-उर रहमान बरकाती ने कहा कि “जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सिर के बाल व दाढ़ी का मुंडन करेगा उसे 25 लाख रुपए का इनाम दिया जाएगा.”

इमाम के इस बयान के बाद पूरे देश में हलचल मची हुई हैं, फिर चाहे वह मीडिया शो हो या फिर अन्य कार्यक्रम, हालाँकि ये इमाम का बयान हैं, लेकिन, मीडिया पर इस बयान को फतवा बताया जा रहा हैं.

गौरतलब हैं कि बरकाती ने इस ऐलान के पीछे नाराजगी की वजह आम आदमी को नोटबदली से हुई परेशानी बताया हैं. ठीक बात है कि अगर देश की सरकार के किसी कदम से आम आदमी को वास्तव में कोई परेशानी होती है तो धर्म जगत से जुड़े लोगों की,मौलाना बरकाती आध्यात्म के क्षेत्र से जुड़े लोगों की जिम्मेदारी है कि वे सत्ता के अहंकार में मदान्ध हो चुके नेतृत्व के विरुद्ध विद्रोही सुर निकालें और उस नेतृत्व को सत्ता से शून्य करें.

भारत के नाव भारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि इसके साथ ही दो अन्य विषय भी चिंता के हैं. पहला विषय यह कि क्या नोटबदली के फैसले से जनता ने जो परेशानी झेली है, उस परेशानी के चलते जनता का बड़ा वर्ग सच में नाराज है?

इसका जवाब मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘नहीं’ है. लेकिन अगर आप मीडिया रिपोर्ट्स की निष्पक्षता को नहीं मानते तो कोई बात नहीं लेकिन जनमत को मानेंगे ही ना? नोटबदली के बाद हुए चुनावों के नतीजे बताते हैं कि जनता ने केन्द्र सरकार या बीजेपी सरकार के फैसले को एक सकारात्मक उद्देश्य के लिए उठाए गए कदम के रूप में लिया है.


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